सऊदी अरब : चुनाव जीतने के बाद भी पुरुषों के साथ नहीं बैठ सकतीं महिलाएं

नई दिल्ली (4 फरवरी) :  सऊदी अरब में चुनाव जीतने के बाद भी महिलाओं को लोकल काउंसिल की बैठकों में पुरुषों के साथ एक छत के नीचे बैठने की इजाज़त नहीं है। इसे घोर रूढ़िवादी सऊदी अरब में महिला के अधिकारों के लिए झटका माना जा रहा है।

'द वॉल स्ट्रीट जरनल'  की रिपोर्ट के मुताबिक लोकल काउंसिल चुनावों में महिलाओं के चुने जाने के बाद नए निर्देश जारी किए गए हैं। इनके मुताबिक काउंसिल की नवनिर्वाचित महिला सदस्य सिर्फ विडियो लिंक के ज़रिए इन बैठकों में हिस्सा ले सकती हैं। पुरुष सदस्य सिर्फ महिलाओं की आवाज़ सुन सकते हैं, उनका चेहरा नहीं देख सकते।   

बता दें कि सऊदी अरब में लोकल काउंसिल के कुल 2106 सदस्यों में से सिर्फ 38 महिलाएं हैं। लेकिन इसके बावजूद वो एक छत के नीचे पुरुषों के साथ बैठकर काउंसिल की मीटिंग्स में हिस्सा नहीं ले सकती।

सऊदी अरब में महिलाओं पर अब भी कई तरह की बंदिशें हैं। जैसे कि वे ड्राइव नहीं कर सकतीं। उन्हें किसी पुरुष रिश्तेदार की रज़ामंदी के बिना विदेश जाने की भी मनाही है।

नए निर्देशों पर महिला अधिकार कार्यकर्ता और कॉलमनिस्ट समर फतानी ने कहा, ये बहुत व्यथित करने वाला है। आप उन्हें सिर्फ शो (चुनाव) के लिए नहीं खड़ा कर सकते। और फिर उन्हें हाशिए पर धकेल दें।

बता दें कि म्युनिसिपल और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ये निर्देश जारी किए थे। लेकिन अब इनके प्रचारित होने पर देश-विदेश में इस पर ध्यान गया है।   

सरकार का ये आदेश महिलाओं और पुरुषों को पृथक रखने वाली सख्त नीति के अनुरूप ही है। दिलचस्प बात ये है कि सऊदी अरब के किंग की गैरनिर्वाचित सलाहकार संस्था शूरा काउंसिल में महिला और पुरुष एक ही असेंबली हॉल में साथ बैठते हैं।

दिसंबर में लोकल काउंसिल के बहुप्रचारित चुनावों में महिलाओं को वोट देने और चुनाव के लिए खड़े होने की इजाज़त दिए जाने को प्रतीकात्मक तौर पर ही सऊदी अरब में महिला अधिकारों को लेकर टर्निंग पाइंट माना गया था। लेकिन देश के कट्टर रूढ़िवादियों ने चुनाव से पहले प्रतिरोध जताया था कि महिलाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार देना समाज के पश्चिमीकरण की तरफ बढ़ना होगा।