सऊदी अरब के किंग ने अपने बेटे को बनाया गद्दी का वारिस


नई दिल्ली(21 जून): सऊदी के सुल्तान सलमान ने अपने भतीजे मुहम्मद बिन नायेफ को हटाकर अपने बेटे मुहम्मद बिन सलमान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। अपने पिता के बाद अब प्रिंस सलमान सऊदी की गद्दी पर बैठेंगे। 


- उनसे पहले क्राउन प्रिंस रहे 57 साल के नायेफ से धीरे-धीरे सभी शक्तियां छीनी जा रही थीं। प्रिंस सलमान सऊदी अरब की गद्दी के वारिसों में दूसरे नंबर पर काबिज थे, लेकिन इसके बावजूद जब से उनके पिता किंग सलमान को गद्दी मिली तब से ही कयास लगाए जा रहे थे कि नायेफ को दरकिनार कर उन्हें वारिस घोषित किया जा सकता है। बता दें कि इससे पहले प्रिंस सलमान ने अप्रैल 2015 में नायेफ को क्राउन प्रिंस बनाया था।


- इससे पहले सऊदी में कभी ऐसा नहीं हुआ कि गद्दी के उत्तराधिकारियों की जमात में दूसरे नंबर पर खड़ा शख्स इतना मजबूत हो गया हो। किंग सलमान भी पिछले काफी समय से नायेफ को कमजोर कर प्रिंस को मजबूत करने की कोशिश करते दिख रहे थे। उन्होंने क्राउन प्रिंस नायेफ के दरबार को विघटित कर अपने कोर्ट में शामिल कर लिया। इससे भी प्रिंस की शक्तियां काफी बढ़ गईं।


- प्रिंस सलमान पहले से ही सऊदी के उप प्रधानमंत्री हैं। साथ ही, वह सऊदी के रक्षा मंत्री भी हैं। 


- 2 साल पहले किंग सलमान जब सऊदी की गद्दी पर बैठे, तभी से उनके बेटे मुहम्मद बिन सलमान का दबदबा बहुत बढ़ गया था। सरकारी फैसलों में उनका काफी हस्तक्षेप था। पिछले कुछ समय में सऊदी ने जितने बड़े फैसले लिए हैं, उनके पीछे प्रिंस सलमान का असर भी देखा जा रहा है। फिर चाहे वह बजट हो, या फिर विदेशी सौदों को रोकना और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कांट-छांट, प्रिंस का असर हर कहीं देखा जा सकता है। सऊदी की राजशाही के लिहाज से देखें, तो प्रिंस सलमान को उत्तराधिकारी बनाया जाना लीक से हटकर लिया गया फैसला है। आमतौर पर यहां सुल्तान बनने वाला शख्स बहुत बुजुर्ग होता है।


- सऊदी के युवा वर्ग में सलमान को पसंद करने वालों की अच्छी-खासी तादाद है। उन्हें लगता है कि युवा सुल्तान उनकी और देश की समस्याओं को बेहतर तरीके से सुलझा सकेंगे। वहीं उनके नए तौर-तरीकों के कारण उन्हें नापसंद करने वालों की भी संख्या भी काफी है। ऐसे लोगों का मानना है कि सलमान ताकत के भूखे हैं और इतने सारे बदलाव कर सऊदी को अस्थिरता के जोखिम की ओर ले जा रहे हैं। मध्यपूर्व की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए यह सवाल वाजिब भी लगता है।