सऊदी अरब में स्पॉन्सर्स से करार तोड़ने वाले विदेशी श्रमिकों से वसूला जाएगा जुर्माना, लगेगा हमेशा के लिए बैन?

नई दिल्ली (20 अगस्त) :  सऊदी अरब में फंसे प्रवासी श्रमिकों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उन्हें जुर्माना, निर्वासन और देश में प्रवेश पर हमेशा के लिए बैन का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति इन श्रमिकों के सऊदी अरब में स्पॉन्सर करने वाले इम्पलॉयर्स (कफ़ील) के साथ बॉन्ड तोड़ने पर आ सकती है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पासपोर्ट एजेंसी ने सऊदी अरब के नागरिकों से भी अपील की है कि वे कफ़ाला व्यवस्था से किनारा करने वाले कामगारों को अपने यहां काम न दें। एजेंसी का कहना है कि यदि उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें भारी जुर्माना ओर जेल भी हो सकती है.

कई मानवाधिकार संगठन पहले भी कफ़ाला व्यवस्था को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। उनके अनुसार यह एक तरह की गुलामी है। सऊदी अरब में कफ़ाला व्यवस्था लागू है। इसके अनुसार यहां विदेशों से आए कामगारों को स्थानीय प्रायोजक के बग़ैर रोज़गार नहीं मिल सकता।

हालांकि सऊदी सरकार मानती है कि इन नियमों से प्रवासी श्रमिकों को कोई दिक्कत नहीं है। श्रम मंत्री मुफरेज़ अल हक़बानी का कहना है कि सऊदी अरब में काम करने वाली ज्यादातर श्रमिक खुश हैं। हालांकि, हाल में जो जानकारियां सामने आई हैं, वो सरकार के दावों के उलट है.

अगस्त की शुरुआत में सऊदी अरब में करीब 10 हज़ार भारतीयों के फंसे होने की ख़बरें आई थीं। भारतीय श्रमिकों का कहना था कि उन्हें कई महीने से वेतन नहीं मिला है. वो खाने-पीने के लिए भी मोहताज हो गए थे। भारत सरकार के दखल के बाद सऊदी सरकार ने उन पर ध्यान दिया गया।