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सऊदी अरब ने पाकिस्तान की झोली में डाली 20 बिलियन डॉलर की भीख !

सऊदी अरब भारत को एक रणनीतिक साझीदार के रूप में देखता है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते महज मजहबी हैं। इसलिए सऊदी अरब ने 20 बिलियन डॉलर के समझौते किसी व्यावसायिक रणनीति के तहत नहीं किये बल्कि पाकिस्तान को जकात (गरीब-गुरबों को दिये जाने वाली भीख) के तौर पर दिये है।

न्यूज24 ब्यूरो, रियाद (18 फरवरी): सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान अल सऊद पाकिस्तान के दो दिन के दौरे के बाद वापस सऊदी चले गये हैं। अब वो मंगलवार को भारत आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि क्राउन प्रिंस भारत में भी भारी निवेश की घोषणाएं करने वाले हैं, लेकिन रियाद में बैठे एशियाई मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब भारत को एक रणनीतिक साझीदार के रूप में देखता है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते महज मजहबी ज्यादा हैं। इसलिए सऊदी अरब ने 20 बिलियन डॉलर के समझौते किसी व्यावसायिक रणनीति के तहत नहीं बल्कि पाकिस्तान को जकात (गरीब-गुरबों को दिये जाने वाली भीख) के तौर पर दिये  है। 

बहुत शालीन भाषा में कहा जा सकता है कि कंगाली झेल रहे पाकिस्तान को सऊदी अरब ने 20 बिलियन डॉलर का बेल आउट पैकेज दिया है। क्यों कि पाकिस्तान के पास नकदी खत्म हो चुकी है। जबकि सऊदी  अरब भारत में पैसा निवेश कर रहा है। भारत की अर्थ व्यवस्था इस समय धुआंधार सात प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है। सऊदी अरब ने भारत को अपने रणनीतिक साझीदार के तौर पर भारत को आठवां स्थान दिया है जबकि पाकिस्तान रणनीतिक या व्यावसिक साझीदारों की सूची में दूर-दूर तक नहीं हैं। 

सऊदी क्राउन प्रिंस दुनिया के सामने पाकिस्तान को भारत के पासंग बराबर भी एहमियत नहीं देना चाहते इसलिए उन्होंने पाकिस्तान से सीधे भारत आने के बजाए वापस रियाद जाकर दिल्ली आने का कार्यक्रम बनाया है। जबकि वो दिल्ली में अपने कार्यक्रम निपटाकर सीधे बीजिंग जायेंगे। दिल्ली में क्राउन प्रिंस काउंटर टेररिज्म और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर द्वपक्षीय समझौते करेंगे। अभी कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन बिलियन डॉलर का बैलेंस ऑफ पेमेंट सपोर्ट दिया था, इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों का भुगतान तीन साल बाद करने की छूट भी दी ताकि फटेहाल पाकिस्तान के हालात में सुधार आ सके।

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