सऊदी अरब क्राइसिस: खाड़ी देशों में अब तक 5900 भारतीय गंवा चुके हैं जान

नई दिल्ली (3 अगस्त): सऊदी अरब में भारतीयों की स्थिती किसी से छिपी नहीं है। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि लोग भूखे मरने पर मजबूर हैं। कुल 7,700 प्रभावित भारतीय कामगार 20 शिविरों में रह रहे हैं। दूतावास सऊदी अरब के विभिन्न हिस्सों में रह रहे अन्य भारतीय कामगारों के बारे में विवरण जुटा रहा है।

> 3.5 मिलियन लोग यूएई में है। वहीं 1.9 मिलियन लोग सऊदी अरब में है। > 5900 भारतीय खाड़ी देशों में जान गंवा चुके हैं। इनमें 2,691 सऊदी अरब में, 1,540 यूएई में और 500 कतर में जान गंवा चुके हैं।

भारत सरकार ने स्थानीय भारतीयों के मदद से इन लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया है। साथ ही इन्हें वापस लाने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। संभावना है कि इस हफ्ते सभी को वापस लाया जाएगा और सऊदी अधिकारियों से भी बातचीत की जा रही है ताकि लोगों की बची हुई तन्ख्वाहें दिलवाई जा सकें।

कुछ तथ्य ऐसे भी... > कुछ लोगों को 7 महीनों से पैसे नहीं मिले। > ये लोग एक ओर खाने का सामान न ख़रीद पाने और दूसरी ओर वतन न लौट पाने की वजह से परेशान हैं। > मेसर्स सऊदी ओगर से जुड़े 4,072 भारतीय कामगार रियाद में नौ शिविरों में रह रहे हैं। > वहीं मेसर्स साद ग्रुप से जुड़े 1,457 कर्मचारियों को दम्माम में दो शिविरों में रखा गया है। > जेद्दाह में छह शिविरों में मेसर्स सऊदी ओगर से जुड़े 2,153 भारतीय कामगार हैं।  > जिन्हें भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा भोजन उपलब्ध कराया गया है। > इस तरह से कुल 7,700 प्रभावित भारतीय कामगार 20 शिविरों में हैं।'

क्या हैं गल्फ में भारतीयों की हालत > ज्यादातर लोग कंसट्रक्शन लेबर का काम करते हैं। > तपती गर्मी में काम करना पड़ता हैं। > समय-समय पर उन्हें भद्दे कमेंट्स भी सहने पड़ते हैं।

बहराइन, कुवैत, कतर, ओमान, इराक, सऊदी अरब और यूएई में सबसे ज्यादा मेहनताना देने की बात कही जाती है। यही कारण है कि हर साल ज्यादातर भारतीय वहां की ओर रुख करते हैं। बता दें कि 30 बिलियन यूएस डॉलर हर साल भारतीय वहां से भारत भेजते हैं।