वर्ल्ड बैंक के कर्जदार सऊदी अरब के हालात नाजुक, 85 फीसदी तक हुए टैक्स

नई दिल्ली (21 जुलाई): सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति नाजुक दौर में पहुंच चुकी है। एक ओर आर्थिक संकट से निपटने के लिए विदेशी तेल कंपिनयों पर अभूतपूर्व करवृद्धि लाद दी गयी है तो वहीं खर्च और घाटे की भरपायी के लिए सऊदी अरब ने पहली बार वर्ल्ड बैंक से कर्जा लिया है। देश में लागू नये संशोधन के अंतर्गत सऊदी अरब में तेल के क्षेत्र में सक्रिय विदेशी कंपनियों की आय पर लगने वाले कर में 45 से 85 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।

अलहयात समाचारपत्र के अनुसार सऊदी अरब अपने वार्षिक आर्थिक कार्यक्रम को तेल के मूल्य में आने वाले उतार-चढ़ाव से दूर रख कर लागू करना चाहता है, इस प्रकार से कि जब तेल के मूल्य में कमी आए तो आय के अन्य स्रोत, सरकारी ख़र्चों को वहन कर सकें। तेल के मूल्य में कमी, यमन में ढाई साल से जारी युद्ध और क्षेत्र व संसार में आतंकी गुटों के व्यापक समर्थन ने आले सऊद सरकार के ख़र्चों को बेतहाशा बढ़ा दिया है। सऊदी अरब को इस समय बजट में 53 अरब डॉलर के घाटे का सामना है और उसने इस घाटे की भरपाई के लिए पहली बार विश्व बैंक से क़र्ज़ लिया है।