...तो पैसे-पैसे के लिए मोहताज हो जाएगा सऊदी अरब

नई दिल्ली (10 मार्च) :  अब वो दिन दूर नहीं जब रियाद पैसों के लिए मोहताज हो जाएगा। ये कहना है अमेरिकी पॉलिटिकल साइंस प्रोफेसर जेम्स डी सेवेज का।

ईरानी न्यूज़ एजेंसी तसनीम से बातचीत में सेवेज ने कहा कि सऊदी अरब का बजट घाटा जीडीपी के 15 से 20 फीसदी पर चल रहा है और देश के करेंसी रिज़र्व को खोखला कर रहा है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के प्रोफेसर सेवेज के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि सऊदी अरब का कैश रिज़र्व अगले 5 साल में ख़त्म हो जाएगा और फिर ये देश कर्ज़ के जंजाल में धंसता जाएगा।

पिछले महीने स्टैंडर्ड एंड पुअर रेटिंग एजेंसी ने सऊदी अरब की रेटिंग कम कर दी थी। इसके मुताबिक कच्चे तेल के दाम गिरने से सऊदी अरब की माली हालत खस्ता होती रहेगी।

रियाद बड़े बजट घाटे का सामना कर रहा है जो इस साल 87 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। बता दें कि सऊदी अरब के कुल राजस्व का 80 फीसदी हिस्सा तेल की बिक्री से ही आता है। सऊदी अरब का विदेशी मुद्रा भंडार 2014 के 717 अरब डॉलर के मुकाबले पिछले साल घटकर 640 अरब डॉलर रह गया है।

देश का कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर सरकार के खर्च कटौती के उपायों से बहुत ख़राब असर पड़ा है। कंस्ट्रक्शन वर्कर्स शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें महीनों से मेहनताना नहीं ला है।  

बजट घाटे को देखते हुए सरकार ने कुछ फौरी कदम उठाए हैं। जैसे कि सरकारी खर्च में कटौती, बॉन्ड्स की बिक्री आदि। इसके अलावा सऊदी अरब पहली बार इंटरनेशनल बॉन्ड्स को भी बेचने की योजना बना रही है।