'पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा आतंकी सऊदी अरब में पैदा हो रहे हैं'

नई दिल्ली (28 दिसंबर): ईरान और अमेरिकी सीनेट के बाद अब खुद सऊदी अरब के गृहमंत्रालय ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि दो हजार से ज्यादा सऊदी नागरिक आतंकी संगठनों में शामिल है। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर  तुर्की ने कहा यह भी कहा कि ये संख्या और भी बड़ी हो सकती है, लेकिन ये आतंकी किन देशों में सक्रिय हैं, इस बात की कोई जानकारी नहीं है। मंसूर ने कहा कि आतंकवाद के आरोप में सऊदी अरब के सैकड़ों नागरिक कई अलग-अलग देशों की जेलों में बंद हैं। सऊदी अरब के गृहमंत्रालय के प्रवक्ता के बयान के बाद कहा जाने लगा है कि पाकिस्तान के बाद सऊदी अरब आतंकियों का दूसरा बड़ा निर्यातक देश बन गया है।

सऊदी अरब के गृहमंत्रालय की ओर से यह बयान आने से पहले ही अनेक संचार माध्यमों में व्यापक रूप से यह बहस हो रही है कि सऊदी अरब दुनिया में आतंकी विचारों का महत्वपूर्ण केन्द्र है। सऊदी अरब के भीतर और विदेशों में सऊदी अरब की ओर से जो गतिविधियां अंजाम दी जा रही हैं उनका जायज़ा लेने से पता चलता है कि आतंकियों में अधिकतर या तो सऊदी नागरिक हैं या सऊदी अरब की वहाबी विचारधारा से प्रभावित हैं और उन्हें आले सऊद से आर्थिक और सामरिक मदद मिल रही है। सऊदी अरब के समर्थन से सक्रिय आतंकी संगठन दाइश, अलक़ायदा, बोको हराम, अश्शबाब और अंसारुश्शरीया अफ़्रीक़, एशिया और यूरोप में सक्रिय हैं और यह विश्व शांति के लिए ख़तरे की घंटी है। विकीलीक्स के एक डाक्युमेंट के अनुसार अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन ने कहा कि सऊदी अरब दुनिया में आतंकी संगठनों की सबसे अधिक आर्थिक सहायता कर रहा है। हिलैरी क्लिंटन के अनुसार पाकिस्तान में तालेबान, अलक़ायदा और लशकरे तैयबा सऊदी अरब की आर्थिक मदद प्राप्त करने वाले प्रमुख संगठन हैं। यही नहीं 11 सितम्बर के आतंकी हमलों के 19 आरोपियों में से 15 सऊदी नागरिक थे।