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सत्यरूप सिद्धांत ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, बने सबसे युवा पर्वतारोही

पश्चिम बंगाल के सत्यरूप सिद्धांत सबसे कम उम्र में सात पर्वत शिखरों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को फतह करने वाले पर्वतारोही बन गए। उन्होंने बुधवार को माउंट सिडेल को फतह करने के साथ ही यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भारतीय समय के अनुसार सुबह 6.28 मिनट पर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सातवें ज्वालामुखी पर्वत माउंट सिडले को फतह किया।

न्यूज24 ब्यूरो,नई दिल्ली (17 जनवरी):  पश्चिम बंगाल के सत्यरूप सिद्धांत सबसे कम उम्र में सात पर्वत शिखरों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को फतह करने वाले पर्वतारोही बन गए। उन्होंने बुधवार को माउंट सिडेल को फतह करने के साथ ही यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भारतीय समय के अनुसार सुबह 6.28 मिनट पर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सातवें ज्वालामुखी पर्वत माउंट सिडले को फतह किया।

माउंट सिडले की ऊंचाई करीब 4285 मीटर है। सत्यरूप ने 35 साल नौ महीने में यह उपलब्धि हासिल कर ऑस्ट्रेलिया के पर्वतारोही डेनियल बुल (36 साल 157 दिन) का रिकॉर्ड तोड़ा। सत्यरूप विश्व के सात पर्वतों और सात ज्वालामुखी पर्वतों पर तिरंगा फहराने वाले पहले भारतीय हैं। सत्यरूप अब तक जिन पर्वत शिखरों पर तिरंगा फहरा चुके हैं, उनमें अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, रूस में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्बरस, अर्जेंटीना में स्थित दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकाकागुआ, नेपाल में एशिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट, ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट कोजिअस्को और अंटाकर्टिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सनमैसिफ शामिल हैं।

सत्यरूप सिद्धांत सात ज्वालामुखी पर्वतों की भी चढ़ाई कर चुके हैं। वे दक्षिण अमेरिका के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत ओजोस डेल सालाडो की भी चढ़ाई पूरी कर चुके हैं।  ईरान में माउंट दामावंद, उत्तरी अमेरिका के मैक्सिको में स्थित सबसे ऊंचे ज्वालामुखी माउंट पिको डे ओरिजाबा और अंटाकर्टिका की चढ़ाई कर चुके हैं। सत्यरूप ने खुद को पर्वतारोहण के लिए तैयार करने के लिए 7 साल तक कड़ी ट्रेनिंग की थी। सत्यरूप बीटेक की डिग्री लेेेेने केे बाद बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर 2015 से सोल्यूशंस आर्किटेक्ट के रूप में काम कर रहे हैं। बचपन में सत्यरूप अस्थमा के कारण इनहेलर के बिना 100 मीटर चलने में भी हांफ जाते थे, लेकिन उनके मन में अपनी इस कमजोरी से पार पाने का जुनून था।

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