"जाकिर पर नहीं लिया था सरकारों ने कोई एक्शन"

नई दिल्ली (9 जुलाई): जाकिर नाईक पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोपों की जांच शुरू हो चुकी है लेकिन इस बीच जाकिर के नाम पर सियासत भी खूब हो रही है। पहले जाकिर को शांतिदूत बताने को लेकर दिग्विजय सिंह पर सवाल उठाए गए और अब बीजेपी सांसद और पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने यूपीए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

सत्यपाल सिंह ने कहा है कि जाकिर नाईक के खिलाफ 2008 में ही केंद्र और राज्य सरकारों को रिपोर्ट भेजी गई थी लेकिन तब की सरकारों ने कोई एक्शन नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जाकिर आज से नहीं एक दशक से सक्रिय है और उसे विदेशों से फंडिंग होती है। उन्होंने जो रिपोर्ट तत्कालीन सरकार को दी थी, उसे दबा दिया गया था।

बागपत से सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह पूर्व में महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर में पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं। सत्यपाल ने बताया कि जाकिर नाईक कोई नया नाम नहीं है, बल्कि वह पिछले एक दशक से ज्यादा समय से ऐसे कार्यों में लिप्त है। उसने आतंकियों के पक्ष में तो बयान अब दिया है, लेकिन धर्म परिवर्तन कराना, विदेशों से फंडिंग और दूसरे धर्म के ग्रंथों को आधार बनाकर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने का काम वह शुरू से कर रहा है।

जाकिर अपने को बड़ा बुद्धिमान होने का दावा करता है। सत्यपाल सिंह ने कहा कि 2008 में जब वह पुणे में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर थे तो उन्होंने जाकिर के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार को रिपोर्ट दी थी, लेकिन कांग्रेस ने रिपोर्ट पर कार्रवाई तो दूर उसे पूरी तरह दबा दिया। जाकिर पर कार्रवाई निश्चित रूप से होगी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में पूरे साक्ष्य और सबूत जुटाने के बाद ही उस पर केस दर्ज होगा। क्योंकि वोट के लालच में देश विरोधी सोच रखने वाले इसमें भी सांप्रदायिक आधार पर कार्रवाई होने की बात करेंगे।