OMG! अब सैटेलाइट्स से ढूंढ़ी जाएगी 'गरीबी'

नई दिल्ली (20 अगस्त): गरीबी को दुनिया की एक कड़वी हकीकत माना जाता है। इसको लेकर आंकड़ें जुटाने में तमाम आर्थिक व राजनैतिक संस्थाएं दिन रात काम करती रहती हैं। लेकिन ये असमानता के रूप में सामने बनी रहती है। इसको लेकर आंकड़े जुटाने में संस्थाओं के पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक अनोखा दावा किया है।

वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट्स से ली गई तस्वीरों और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके उन इलाकों में गरीबी का पता लगाने का एक किफायती एवं अधिक विश्वसनीय तरीका ढूंढ निकाला है, जहां इस संबंधी आंकड़ा जुटाना मुश्किल होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से रिसर्चर्स ने कहा कि इससे सहायता मुहैया कराने वाले संगठनों एवं नीति निर्माताओं को अधिक प्रभावशाली तरीके से फंड वितरित करने में मदद मिलेगी। साथ ही नीतियों को अधिक असरदार तरीके से क्रियान्वयन एवं मूल्यांकन करने में सहायता मिलेगी।

- गरीबी में रह रहे लोगों को मदद मुहैया कराने के समक्ष पेश आने वाली सबसे बड़ी चुनौती उनका पता लगाने की है।  - खासकर अफ्रीकी महाद्वीप में गरीबी में रह रहे लोगों के क्षेत्र में सटीक एवं विश्वसनीय सूचना का अभाव है। - सहायता समूह एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन घर-घर जाकर सर्वेक्षण करके इस अंतर को पूरा करते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है और यह महंगी है। - अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने उपग्रह से मिलने वाली हाई रेजोल्यूशन वाली तस्वीरों से गरीबी के बारे में सूचना निकालने के लिए मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया। - मशीन लर्निंग आंकड़ों पर आधारित प्रणालियों के निर्माण एवं अध्ययन से संबंधित विज्ञान है।

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