बिस्मार्क से इसलिए की जाती है सरदार पटेल की तुलना

नई दिल्ली (31 अक्टूबर): आज हिंदुस्तान दुनिया भर में अगर सुपर पावर के रूप में उभर रहा है तो इसके पीछे सरदार पटेल की नीतियों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने दुनिया भर में भारत की धाक जमाने की पहली बड़ी कोशिश की थी। सरदार ने ये साबित कर दिया था कि भारत के पास हर चुनौती का सामना करने की शक्ति है और कश्मीर से कन्याकुमारी तक वो एक है और एक बना रहेगा।

अंग्रेजों ने देश के बंटवारे की कीमत पर हमें आजादी दी थी। ब्रिटिश सरकार की पूरी कोशिश थी कि हिंदुस्तान को सैकड़ों टुकड़ों में बांट दिया जाए। अंग्रेजों ने इसके लिए बड़ी साजिश रची। उन्होंने 565 देसी राजे-रजवाड़ों को अपनी किस्मत का फैसला खुद करने का विकल्प दिया था, लेकिन सरदार पटेल के करिश्मे ने अंग्रेजों के षडयंत्र को नाकाम कर दिया।

आजादी के ठीक बाद सरदार पटेल ने गुजरात की जूनागढ़ रियासत को भारत में शामिल कराया। जूनागढ़ चारों तरफ से भारत से घिरा था, लेकिन यहां का नवाब भारत में विलय के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद गृहमंत्री सरदार पटेल ने सख्त कदम उठाया। जूनागढ़ को होने वाली तेल-कोयले की सप्लाई रोक दी गई, हवाई-डाक संपर्क रोक दिए गए और आर्थिक नाकेबंदी कर दी गई।

इसके बाद जनता भी नवाब के खिलाफ विद्रोह पर उतर आई। कोई और रास्ता नहीं देखकर 26 अक्टूबर 1947 को जूनागढ़ का नवाब परिवार समेत पाकिस्तान के कराची भाग गया और फिर 7 नवंबर 1947 को जूनागढ़ को औपचारिक तौर पर भारत में शामिल कर लिया गया। जब पटेल विलय के बाद जूनागढ़ पहुंचे तो यहां जनता ने उनका जबर्दस्त स्वागत किया।

सरदार का जन्म गुजरात के एक छोटे से गांव करमसद में हुआ था। लेकिन उनकी सोच का दायरा बहुत बड़ा था। शक्तिशाली भारत के निर्माण के लिए सरदार ने जो कदम उठाए, इस वजह से उनकी तुलना बिस्मार्क से की जाती है जिन्होंने 1860 में जर्मनी का एकीकरण किया था।