नर्मदा के पानी से भारत का स्वर्णिम इतिहास लिखा जाएगा: पीएम मोदी

नई दिल्ली (17 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 67वें जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध का उद्धघाटन किया। इसके बाद पीएम मोदी नर्मदा महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। इस मौके पर पीएम मोदी ने सरदार सरोवर बांध को इंजिनियरिंग का अनूठा नमूना बनाते हुए इसे देश के लिए बड़ा सौगात बताया।

पीएम ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती के दिन इस डैम को देश को समर्पित करना डैम का निर्माण करने वालों का स्मरण भी है। पीएम ने साथ ही कहा कि अगर सरदार बल्लभ भाई पटेल और भीमराव आंबेडकर अगर कुछ दिन और जीवित रहते तो यह बांध 60-70 के दशक में ही बनकर तैयार हो जाता, लेकिन दुर्भाग्य से हमने उन्हें बहुत पहले खो दिया। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध देश की ताकत का प्रतीक बनेगा। भारत में जलक्रांति का श्रेय अंबेडकर को जाता है और सरदार पटेल जीवित रहते तो ये बांध 60 के दशक में ही बन जाता।

प्रधानमंत्री ने वर्ल्ड बैंक पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया के शीर्ष बैंक ने पर्यावरण का हवाला देते हुए फंड देने से मना कर दिया। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना तो देखा कि लोगों को पीने के पानी के लिए तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ती। पाकिस्तान सीमा पर तैनात हमारे जवानों को पानी के लिए मेहनत करनी पड़ती थी। ऊंट से पानी ढोना पड़ता था। विकास के रास्ते में पानी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। हमने गुजरात के पसीने से सरदार सरोवर बांध बनाया है।

मोदी ने कहा कि हम पर अनाश शनाप आरोप लगाए गए, लेकिन हमने हमेशा इसको राजनीतिक विवाद से बचाने की कोशिश की। सबने राजनीति की और मुश्किलें खड़ी करने की कोशिश की। गुजरात के संतों ने हमारा साथ दिया और गुजरात के मंदिरों से भी पैसे दिए गए थे और तब जाकर सरदार सरोवर डैम बना। ये कोटि-कोटि जनों का काम है।

मोदी ने बांध से जुड़े कैनाल नेटवर्क को इंजीनियरिंग का जादू करार दिया और कहा कि 700 किलोमीटर दूर से जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात जवानों के पास पानी पहुंचा, तो उनके चेहरे पर खुशी देखने लायक थी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत और जसवंत सिंह राजस्थान को इस डैम से पानी मिलने को लेकर भावुक थे जिस पानी के लिए तलवारें चलती थी उसे पानी मिलना, कितनी बड़ी बात है। हमने बाड़मेर तक पानी पहुंचाया। नर्मदा के पानी से भारत का स्वर्णिम इतिहास लिखा जाएगा।

मोदी ने कहा कि आप भलीभांति जानते हैं कि मुझे छोटा काम भाता नहीं है। न मैं छोटा सोचता हूं और न छोटा काम करता हूं और इसीलिए मैंने सरदार साहब का स्टैच्यू बनाने का फैसला लिया तो तय किया कि स्टैच्यू सबसे ऊंची होगा। अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ऊंचा। आप कल्पना कर सकते हैं कि स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने कितने लोग जाते हैं और यही गुजरात में होने वाला है। लाखों लोग सरदार पटेल की प्रतिमा देखने आएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि देश को आजाद कराने में सिर्फ मुट्ठी भर लोगों ने योगदान दिया। कुछ लोगों ने बाकियों को भुला दिया। आदिवासियों का बलिदान भूलना नहीं चाहिए। हमारे आदिवासी भाइयों ने मां भारती के लिए बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया। हिंदुस्तान में जहां-जहां आजादी के जंग के लिए संघर्ष किया, बलिदान दिया उन आदिवासी वीरों के लिए हमारी सरकार म्यूजियम बनाना चाहती है।