पीएम मोदी आज करेंगे सरदार पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण, जानें प्रतिमा की खासियत

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (31 अक्टूबर): आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा सपना पूरा होने जा रहा है। आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उनकी भव्य प्रतिमा का उद्घाटन होगा। नाम है स्टेच्यू ऑफ यूनिटी।  दुनिया के इस आठवें अजूबे के उद्घाटन के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं। पीएम मोदी 10 बजे मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे।जितना था सरदार का कद, वैसी ही है उनकी प्रतिमादुनिया का आठवां अजूबा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी', जिसे आंधी, तूफान, भूकंप कोई हिला नहीं सकता। न्यूयॉर्क के स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से दो गुणा, रियो डी जेनेरो के क्राइस्ट द रिडीमर से पांच गुणा, चीन के स्प्रिंग टेंपल की बुद्ध मूर्ति भी इसके सामने छोटी है। ये देश ही नहीं दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। गुजरात के सरदार सरोवर डैम पर बनी लौह पुरुष की इस प्रतिमा की खासियत सुनकर हर कोई दंग रह जाएगा। 6 फीट के इंसान के कद से बड़े हैं लौह पुरुष के होंठ सात मंजिला इमारत से ऊंचा है सरदार का चेहरा 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का असर भी इस स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर नहीं पड़ेगा। बड़े से बड़ा भूकंप भी सरदार की इस मूर्ति को डिगा नहीं पाएगा। 65 मंजिला इमारत जितनी ऊंची है सरदार वल्लभ भाई पटेल की ये मूर्ति सरदार पटेल की इस मूर्ति की ऊंचाई 522 फीट यानी 182 मीटर है। मूर्ति का वजन 1700 टन है। पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फीटऔर चेहरे की ऊंचाई 70 फीट है। इस मूर्ति का निर्माण देश-विदेश में अपनी शिल्प कला का लोहा मनवाने वाले राम वी. सुतार की देखरेख में हुआ है।सरदार सरोवर बांध से करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर बनी इस मूर्ति को बनाने में करीब 5 साल का वक्त लगा। इस स्मारक की आधारशिला  31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी। जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मूर्ति बनाने के लिए बीजेपी ने पूरे देश में लोहा इकट्ठा करने का अभियान भी चलाया। इस काम को तय समय में अंजाम तक पहुंचाने के लिए 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया। इसमें 800 स्थानीय और 200 चीन से आए कारीगरों ने भी काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरदार पटेल की ये मूर्ति ऐसी बनेगी जिसे दुनिया देखने आएगी। सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये। वहीं 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएं। 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये हैं।सरदार पटेल की ये भव्य मूर्ति बनाने के लिए 4 धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगा। स्टेच्यू में 85 फीसदी तांबे का इस्तेमाल किया गया है। मूर्ति में दो हजार मीट्रिक टन ब्रॉन्ज लगाया गया है.. प्रोजेक्ट में एक लाख 70 हजार क्यूबिक मीटर कॉन्क्रीट का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा 5700 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18500 मीट्रिक टन रिइनफोर्समेंट बार्स भी इस्तेमाल किया गया है। ये मूर्ति 22500 मीट्रिक टन सीमेंट से बनी है। इसमें कोई शक नहीं कि सरदार पटेल की ये मूर्ति अद्भुत, अविश्वसनीय, अजूबा है। जिसका नाम बहुत जल्द पूरी दुनिया जान जाएगी।

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