एक्सपर्ट कमेटी ने माना, सरस्वती नदी थी और उसको जीवंत किया जा सकता है

नई दिल्ली ( 15 अक्टूबर ) : सरस्वती नदी की खोज पर बनी केंद्र की एक्सपर्ट कमेटी ने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। एक्सपर्ट कमेटी ने माना कि सरस्वती नदी थी और उसको जीवंत किया जा सकता है। कमेटी ने सरस्वती को जीवित करने के लिए सुझाव केंद्र सरकार को सौंपे।

जाने-माने भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर केएस वाल्दिया की अध्यक्षता वाले एक विशेषज्ञ दल ने केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास, गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती को जांच की  रिपोर्ट शनिवार को एक कार्यक्रम में सौंपी जिसमें सरस्वती नदी के अस्तित्व में रहने की बात प्रमाणित हुई है।
   

इस मौके पर सुश्री भारती ने कहा कि यह विश्व की सबसे प्रामाणिक रिपोर्ट है और इससे प्रमाणित हो गया है कि गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में कभी सरस्वती नदी बहती थी जो हिमालय के आदि बद्री से निकलती थी और उन्हें खुशी है कि विशेषज्ञ समिति में शामिल वैश्विक स्तर पर बेहद प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने व्यापक अध्ययन करके इसकी पुष्टि की है।  

उन्होंने कहा कि आगे इस बारे में अध्ययन किया जाएगा कि सरस्वती की सुप्त जलधारा की क्षमता कहां कितनी है और उससे गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में सूखे का मुकाबला कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी की नयी धारा को लाने की तुलना में पुरानी धारा को पुनर्जीवित करना कम खर्चीला होता है।  

गौरतलब है कि पौराणिक सरस्वती नदी को जिंदा करने के लिए हरियाणा में पहले से ही खुदाई का काम चल रहा था। हरियाणा की खट्टर सरकार कई बार केंद्र से मदद के लिए गुहार लगा चुकी है। बाद में केंद्रीय जल संसाधन उमा भारती ने एक टास्क फोर्स का गठन कर इस पर शोध किए जाने का आदेश दिया था।  

कुछ महीने पहले जब हरियाणा के यमुनानगर में सरस्वती नदी की खुदाई के दौरान जल निकला तो बड़े-बड़े नेता दर्शन के लिए पहुंचे। अब हरियाणा के तीन जिलों में सरस्वती नदी का प्रवाह क्षेत्र मानते हुए 260 किलोमीटर में खुदाई की तैयारी हो रही है। हिंदू ग्रंथों में सरस्वती नदी का कई जगह जिक्र मिलता है। ऋग्वेद का पहला हिस्सा इसी नदी के किनारे लिखा गया। महाभारत में इस नदी के गायब होने की बात लिखी गई है। नासा और इसरो अंतरिक्ष से मिले सिग्नल भी इस नदी के रुट की गवाही देते हैं।