Watch: 'संस्कृत' में बनी तीसरी भारतीय फिल्म 'प्रियमानसम्' के सितारे बुलंद

नई दिल्ली (3 जनवरी): भारत एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा संख्या में फिल्में बनती हैं। इनमें देश की कई भाषाओं जैसे हिंदी, तमिल, तेलुगू, पंजाबी, भोजपुरी, मलयालम की फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा अन्य विदेशों की फिल्मों के डब्ड वर्जन भी नेशनल टेलीविजन चैनल्स पर प्रसारित होते रहते हैं। आप ये सभी देखते होंगे। लेकिन क्या आपने कभी संस्कृत भाषा की फिल्म देखी है?

इस सवाल का जवाब शायद 'ना' ही होगा। दरअसल, इसकी वजह है, कि संस्कृत में बनने वाली फिल्मों की संख्या बहुत कम है। इसके अलावा इस भाषा को समझने वाले लोगों की संख्या भी बेहद कम है। यही कारण है कि इनकी मार्केट वैल्यू भी नहीं है। इन्हें सिनेमाघरों या टेलीविजन पर जगह मिलना मुश्किल है। यही कारण है कि इनकी स्क्रीनिंग शायद फिल्म फेस्टिवल्स तक ही सीमित है। आपको बता दें, दुनिया की तीसरी संस्कृत फिल्म 'प्रियमानसम' अभी हाल ही में रिलीज हुई है। इस फिल्म की स्क्रीनिंग नवंबर में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) में की गई। स्क्रीनिंग के बाद अब इस फिल्म को और भी ज्यादा दर्शक मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फिल्म के डायरेक्टर विनोद मंकारा हैं। यह फिल्म 17वीं सदी के केरल के एक कवि और स्कॉलर उन्नई वारियर के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म को चुनिंदा प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक चुना गया है। मंकारा ने बताया, ''इस फिल्म की स्क्रीनिंग देश के कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में की जाएगी।'' बता दें, इससे पहले संस्कृत में केवल दो फिल्में ही बनाई गई।  साल 1983 में 'आदि शंकराचार्य' और साल 1993 में 'भगवतगीता' नाम की फिल्में संस्कृत में बनाई गई थी। इनका निर्देशन जीवी अइयर ने किया था। 

आप भी देखिए इस फिल्म का ट्रेलर:

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