संजू बाबा ने पहली बार बताया, जेल में क्या-क्या किया

मुंबई (1 सितंबर): जेल से छूटने के बाद पहली बार संजू बाबा ने वहां पर बिताए गए पलों के बारे में खुलकर बात की। अपने जेल के एक्सपीरियंस के बारे में संजय ने बताया कि मैंने भगवद् गीता, रामायण और पुराण पढ़ी।

संजय दत्त ने कहा कि जेल में मैंने भगवद् गीता, रामायण और पुराण पढ़ी। वहां मैंने मराठी सीखी और वर्कआउट करने के लिए बाल्टी और रस्सी का प्रयोग करता था। मैंने वहां पेपर बैग बनाने भी सीखे हैं। इसके अलावा मैंने वहां के रेडियो स्टेशन में भी काम किया है और जेल की नाटक मंडली में शामिल 60-70 कैदियों को ऐक्टिंग सिखाई।

बकौल संजय ज्यादातर कैदी पेशे से अपराधी नहीं हैं, बल्कि उन्होंने परिस्थितिवश गलती से क्राइम कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने भी गलती की थी। मुझे ज्यादा जिम्मेदार होना चाहिए था, लेकिन तब मैं काफी यंग था। अब मैंने इसकी सजा भुगत ली है और आगे बढ़ चुका हूं। संजय के अनुसार अगर वे वक्त को वापस पीछे ले जा सकते, तो वे अपने पैरंट्स की बात मानते और गिरफ्तारी के बाद कानून का पूरी तरह से पालन करते।

संजय कहते हैं, 'हर नागरिक को कानून की पूरी जानकारी होनी चाहिए। क्योंकि अगर आप एक बार जेल चले गए तो कितने भी पैसे खर्च कर लीजिए, आप वापस आजादी नहीं पा सकते। साल 1993 में जब मैं एमएन सिंह (तात्कालिक जॉइन्ट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम) के पास गया, तो उन्होंने फैसला लिया कि मुझ पर मुकदमा टाडा के तहत चलाया जाएगा। अगर तब मुझे टाडा का मतलब पता होता तो मैं इसके बारे में जरूर पूछता। मगर सुप्रीम कोर्ट के तहत मुझे आर्म्स एक्ट फॉर पोसैशन ऑफ ए राइफल के तहत सजा दी। मेरे लिए यह भी राहत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुझ पर आतंकवादी या राष्ट्र विरोधी होने का ठप्पा नहीं लगा। अगर मेरे पिता (सुनील दत्त) होते तो उन्हें बहुत खुशी होती।'