लोग सुनेंगे लेकिन पार्टी के बिगड़ने के बाद- अखिलेश यादव

लखनऊ (5 नवंबर): उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद चुनाव होने हैं। लिहाजा समाजवादी पार्टी भी चुनाव प्रचार में जुटी है, लेकिन शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के जारी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाजवादी पार्टी की रजत जयंती समारोह के मौके पर शुरुआत में सबकुछ ठीक दिख रहा था। मंच पर अखिलेश यादव ने चाचा शिवापल यादव का पांव छूकर आर्शिवाद लिया। जवाब में शिवपाल यादव ने भतीजे अखिलेश यादव को तलवार भेंट कर आर्शिवाद भी दिया। लेकिन जैसे ही मंच पर बोलने का मौका आया, ये नजदीकियां एकबार फिर दूरियों में तब्दील होते दिखने लगी। माइक पहले चाचा शिवपाल ने संभाला। भतीजे को भरोसा देते हुए कहा कि अखिलेश अगर खून भी मांगेंगे तो वो हंसते-हंसते दे देंगे, मुख्यमंत्री तो कभी नहीं बनेंगे। लेकिन इसके बाद चाचा का दर्द झलका। भतीजे को जमकर लताड़ लगाई, नसीहत दी। 

अब बारी सीएम अखिलेश की थी। अखिलेश ने राममनोहर लोहिया के एक बयान का हवाला देकर शिवपाल पर पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि लोहिया जी ने कहा करते थे, लोग सुनेंगे जरूर लेकिन मेरे मरने के बाद। मैं दूसरे शब्दों में कह रहा हूं कि लोग समाजवादी पार्टी की सुनेंगे जरूर लेकिन पार्टी के बिगड़ने के बाद। इशार-इशारों में अपने दर्द को बयां करते हुए अखिलेश ने कहा कि आप लोग मुझे तलवार भेंट करते हो लेकिन चाहते हो कि मैं तलवार नहीं चलाऊं। विचारधारा को बचाने के लिए तलवार चलानी जरूरी है।

शिवपाल और अखिलेश यादव के इन बयानों से साफ है कि मुलायम सिंह की लाखा कोशिशों के बावाजूद पार्टी में अब भी सबकुछ ठीक नहीं है और आगे आने वाले दिनों में इसबात की कोई गायरंटी नहीं है कि चाचा-भतीजे की सियासी जंग एकबार फिर खुलकर बाहर ना निकल जाए। फिलहाल मुलायम सिंह की दखल के बाद अखिलेश और शिवपाल शिद्दत से चुनाव प्रचार और समाजवादी पार्टी से फिर से सत्ता में लाने की बात जरूर कर रहे हैं।