CJI के खिलाफ महाभियोग में सलमान खुर्शीद ने खुद को किया अलग, विपक्षी दलों में भी फूट

नई दिल्ली (20 अप्रैल): सात विपक्षी दलों के सहयोग से कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने जा रही है। इस सिलसिले में गुलाम नबी आजाद, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, एनसीपी की वंदना चौहान, सीपीआई के डी. राजा ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मिलने पहुंचे और उन्हें महाभियोग का प्रस्ताव सौंप दिया है।

हालांकि इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद अलग राज जाहिर कर रहे हैं। सलमान खुर्शीद ने कहा कि चाहे जज लोया का मामला हो या कोई अन्य, सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम होता है। अगर शीर्ष कोर्ट के फैसले को लेकर किसी को कोई आपत्ति है तो पुनर्विचार याचिका, उपचारात्मक याचिका दाखिल करने की छूट होती है। यह अलग बात है कि इनका दायरा बहुत सीमित होता है।

Impeachment is too serious a matter to be played with frivolously on the grounds of disagreement with any judgement or point of view of the Court.: Salman Khurshid, Congress on the Impeachment Motion against CJI Dipak Misra pic.twitter.com/KZtQ9l2UMI

— ANI (@ANI) April 20, 2018

I am not party to or privy with discussions that have taken place between different parties and for me to reflect specifically on whether the grounds are justified would be unfair: Salman Khurshid, Congress on the Impeachment Motion against CJI Dipak Misra pic.twitter.com/FFFldog9Jb

— ANI (@ANI) April 20, 2018

कांग्रेस ने सीपीएम, सीपीआई, एसपी, बीएसपी, एनसीपी और मुस्लिम लीग के समर्थन का पत्र उपराष्ट्रपति को सौंपा है। लेकिन, बिहार में पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल लालू प्रसाद की आरजेडी और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस उसके इस प्रस्ताव के साथ नहीं नजर आ रहे। दोनों दलों ने महाभियोग को लेकर हुई मीटिंग में भी हिस्सा नहीं लिया।

प्रस्ताव का समर्थन करने वाली प्रमुख वामपंथी पार्टी सीपीएम में भी इसे लेकर मतभेद की स्थिति दिख रही है। एक तरफ सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने प्रस्ताव का समर्थन देने की बात कही तो सीनियर लीडर प्रकाश करात ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी ही नहीं है। बता दें कि ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी पहले से ही इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं है।

महाभियोग की प्रक्रिया...

आपको बता दें कि CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा में 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। हस्ताक्षर होने के बाद प्रस्ताव संसद के किसी एक सदन में पेश किया जाता है। यह प्रस्ताव राज्यसभा चेयरमैन या लोकसभा स्पीकर में से किसी एक को सौंपना पड़ता है।

जिसके बाद राज्यसभा चेयरमैन या लोकसभा स्पीकर पर निर्भर करता है कि वह प्रस्ताव को रद्द करे या स्वीकार करे। अगर राज्यसभा चेयरमैन या लोकसभा स्पीकर प्रस्ताव मंजूर कर लेते हैं तो आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाता है। इस कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक न्यायविद् शामिल होता है।

इसके बाद अगर कमेटी जज को दोषी पाती है तो जिस सदन में प्रस्ताव दिया गया है, वहां इस रिपोर्ट को पेश किया जाता है। यह रिपोर्ट दूसरे सदन को भी भेजी जाती है। जांच रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से समर्थन मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए चीफ जस्टिस को हटाने का आदेश दे सकते हैं।