मिलिए: रियो में भारत को पहला मेडल दिलाने वाली साक्षी से

नई दिल्ली(18 अगस्त): भारत के लिए रियो ओलंपिक में पहला ओलंपिक पदक जीतने वाली 23 वर्षीय साक्षी मलिक हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली हैं। साक्षी के पहलवानी शुरु करने की कहानी बेहद रोचक है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि केवल पहलवानों की ड्रेस पसंद आने के कारण साक्षी ने पहलवानी को खेल के रुप में अपना लिया। साक्षी ने पहलवान बनने का सपना केवल इसलिए देखा क्योंकि उन्हें पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगती थी। 

• ड्रेस के लिए कुश्ती खेलने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह कभी उनके परिवार वालों ने भी नहीं सोचा था। कहीं भी बेटी को पहलवान बनाने में परिवार वाले थोड़ा हिचकते जरूर हैं, लेकिन साक्षी मलिक ने अपनी मां सुदेश के सामने खेलने की इच्छा जताई तो वे उसे लेकर रोहतक के छोटूराम स्टेडियम पहुंच गईं। 3 सितंबर 1992 को जन्मीं साक्षी ने मलिक मजह 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरु कर दी थी। 

• साक्षी मलिक जब बड़ी हो रही थीं तो लोग उनके परिवार को कहते थे कि बेटी को पहलवानी ना सिखाएं क्योंकि उससे उनके कान बड़े हो जाएंगे और फिर शादी नहीं होगी। पहलवानों में कान बड़े हो जाना आम बात है। 

• जब साक्षी की मां उन्हें छोटूराम स्टेडियम लेकर पहुंचीं तो उन्हें वहां जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा गया, लेकिन साक्षी ने साफ इंकार कर दिया। फिर उनकी मां उन्हें दूसरे एथलीट व अन्य कई खेलों के खिलाड़ियों के पास ले गईं, सबसे आखिर में वह साक्षी को रेसलिंग हाल में लेकर पहुंची। वहां साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी तो उसने कुश्ती खेलने की इच्छा जताई। साक्षी की मां सुदेश बताती हैं कि उस समय साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी और उसने कहा था कि यह ड्रेस अच्छी है, इसलिए वह भी कुश्ती लड़ेगी। उस समय उनकी मां को लगा था कि बेटी की इच्छा है तो खेलने देते हैं, जब तक मन होगा खेलती रहेगी।

• एक दिन साक्षी से उनकी मां ने कहा कि वह कोई भी काम करे उसे पूरी मेहनत से करे। चाहे पढ़ाई हो या कुश्ती। शायद उस दिन से साक्षी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके बाद साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उस समय परिवार को भी यह महसूस होने लगा कि उनकी बेटी ने सही खेल चुना है। इसके बाद राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और अब रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर साक्षी ने इतिहास रच दिया है।