2019 लोकसभा चुनाव से पहले बन जाएगा राम मंदिर- साक्षी महाराज

नई दिल्ली (9 जनवरी): एक बार फिर से राम मंदिर का मामला सुर्खियों में आ गया है। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का ये बयान सियासत की बदलती फिजा की सबूत दे रही है। साक्षी महाराज डंके की चोट पर राम मंदिर के बनाने की बात कह रहे हैं और सिर्फ बात ही नहीं कह रहे, बल्कि राम मंदिर कब बन जाएगा, इसका वक्त भी बता रहे हैं। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि 2019 तक राम मंदिर बन जाएगा।

488 साल पुराना है मंदिर विवाद 488 साल पुराना एक विवाद, जो पिछले साठ साल से कानूनी दांव पेंच में उलझा हुआ है। क्या अयोध्या में उसी जमीन पर अब दिसंबर से राम मंदिर बनाने का काम शुरु हो जाएगा? ये सवाल इसलिए क्योंकि आज पहली बार बीजेपी की तरफ से किसी ने राम मंदिर बनाने की तारीख का ऐलान किया है।

2019 में होने हैं चुनाव

 

जैसा कि आप जानते हैं कि 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। अगर साक्षी महराज की माने तो अगले लोकसभा चुनाव के पहले अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन सवाल ये है कि ऐसा होगा कैसे। साक्षी महाराज कुछ भी साफ-साफ तो नहीं कहते, लेकिन इस सवाल के जवाब में वो तीन विकल्प जरुर बताते हैं, जिनके जरिए राम मंदिर बन सकता है।

हो रही बयानबाजी से मचा घमासान बहरहाल बयानों का असर अब दिखने लगा है। स्वामी और साक्षी महाराज के बयानों पर सियासी घमासान मच गया है। समाजवादी पार्टी के नेता नवाब भुक्कल ने मंदिर बनना शुरू होने पर 10 लाख रुपए दान करने और रामलला के लिए सोने का मुकुट देने का वादा किया है, जो मंदिर बनाने का दावा करने वालों के लिए एक चुनौती की तरह है।

कांग्रेस ने साधा निशाना इस मुद्दे को लेकर अब सभी पार्टियां मैदान में कूद पड़ी हैं। कांग्रेस फिर से एक बार बीजेपी के नेताओं के बयान के सहारे आरएसएस पर निशाना साध रही है। साथ ही कांग्रेस को मोदी सरकार पर भी हमलावर होने का एक और बहाना मिल गया है।

सुप्रीम कोर्ट में है मंदिर का मसला ऐसे हर सवाल का जो जवाब वीएचपी नेताओं के साथ बैठक करने के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दिया है। उसने राम मंदिर के मुद्दे को फिर से हवा दे दिया। ये बात पूरा देश जानता है कि राम मंदिर का मसला सुप्रीम कोर्ट में है। खुद बीजेपी के बड़े नेता भी कोर्ट के फैसले के साथ ही राम मंदिर मुद्दे का हल चाहने का दावा करते हैं। लेकिन उससे पहले ही स्वामी राम मंदिर निर्माण के लिए दिसंबर का वक्त तय करते हैं तो विरोधी इसमें साजिश सूंघ रहे हैं।

क्या है पूरा विवाद 488 साल पहले 1528 में अयोध्या के रामकोट में बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी। जिसे मस्जिद-ए-जन्मस्थान या बाबरी मस्जिद कहा गया। हिंदुओं का दावा रहा कि यहां राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई। लेकिन कानूनी लड़ाई शुरु हुई 1949 के बाद। जब 1949 के दिसंबर महीने में एक दिन अचानक किसी ने मस्जिद के अंदर और मुख्य गुम्बद के नीचे रात के वक्त भगवान राम और सीता की मूर्तियां रख दी।

इसके बाद जनवरी 1950 में गोपाल सिंह विशारद नाम के शख्स ने फैजाबाद की अदालत में पहला मुकदमा दाखिल करके इस जगह पर पूजा करने की इजाजत मांगी थी। इसके बाद कानूनी लड़ाई बढ़ती चली गई। हाईकोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।