साध्वी प्रज्ञा ने लगाई सिंहस्थ में डुबकी, मोदी को बताया राष्ट्रभक्त

आनंद निगम/गोविंद सिंह, भोपाल (18 मई): मालेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा जिन्हें पिछले हफ्ते NIA ने क्लीनचिट दे दी और आज साध्वी प्रज्ञा के सिंहस्थ कुंभ में जाने के हठ के आगे शिवराज सरकार को झुकना पड़ा। ये अपने आप में शायद पहला मामला होगा, जब किसी धमाके की आरोपी को किसी धार्मिक मेले में जाने की इजाजत मिली है। सिंहस्थ कुंभ में पहुंचने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने एक बार फिर खुद को निर्दोष बताया और कहा कि नरेंद्र मोदी सबसे बड़े राष्ट्रभक्त हैं।

सिंहस्थ कुंभ में स्नान करने के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था। इस चिट्ठी में साध्वी ने चेतावनी दी थी उन्हें 21 मई तक सिंहस्थ में स्नान करने की इजाजत नहीं दी गई तो वे अपनी जान दे देंगीं। साध्वी ने सोमवार सुबह से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी। आखिरकार प्रशासन और सरकार को झुकना पड़ा और शायद पहली बार ऐसा हुआ कि एक विचाराधीन कैदी वो भी बम धमाके के मामले से जो जुड़ा हो, उसे किसी धार्मिक मेले में इस तरह भेजने के लिए प्रशासन मजबूर हो गया।

8 साल पुराने मालेगांव धमाके की साजिश रचने का आरोप साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर है। महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी की थी, लेकिन अब NIA ने अपनी जांच में साध्वी प्रज्ञा को क्लीनचिट दे दी है। यही वजह है कि सिंहस्थ कुंभ में पहुंचने के बाद खुद को मिली क्लीनचिट को अपनी आधी जीत साध्वी प्रज्ञा बताने लगीं। सिंहस्थ कुंभ में साध्वी प्रज्ञा के भेजने की इजाजत देने से शिवराज सरकार आनाकानी कर रही थीं। इसलिए शिवराज सिंह चौहान पर साध्वी खूब बरसी, लेकिन नरेंद्र मोदी को लेकर जब सवाल हुआ तो उन्हें सबसे बड़ा राष्ट्रवादी साध्वी बताने लगीं। खबर है कि साध्वी के हठ के आगे जब शिवराज सिंह अड़े थे, तब संघ को बीच का रास्ता निकालने के लिए उतरना पड़ा था। दावा है कि तब संघ की तरफ से दो बड़े नेताओं ने शिवराज सरकार से संपर्क साधा था और उसी के बाद साध्वी को सिंहस्थ कुंभ में जाने की इजाजत मिली।

मालेगांव बम विस्फोट मामले में पिछले हफ्ते NIA ने चार्जशीट दाखिल करते हुए 11 आरोपियों में से छह पर लगे आरोपों को हटा दिया। इनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और अन्य पांच शामिल हैं। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित और अन्य दस के खिलाफ लगाए गए मकोका को भी हटा दिया गया है। लेकिन इस मामले पर गौर किया जाए तो धमाके के छह मेन आरोपियों को लेकर देश की दो बड़ी जांच एजेंसियां एटीएस और एनआईए की राय बिल्कुल अलग-अलग है।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जो बचपन के दिनों में बाकी लड़कियों से अलग 'टॉमबॉय' जैसी छवि ऱखती थी। जो जीन्स, टी-शर्ट पहनतीं, लड़कों की तरह छोटे बाल रखतीं और मोटरसाइकल चलाती थीं। जो राह चलते छेड़छाड़ करने वाले लड़कों से भी बेधड़क जाकर भिड़ जाती थीं। आज उसका जिक्र जब आता है तो सियासत में भगवा आतंकवाद का शब्द जुड़ जाता है। मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में भिंड से ताल्लुक रखने वाली प्रज्ञा सिंह के पिता संघ से जुड़े थे। इतिहास में एमए 46 साल की प्रज्ञा का हमेशा से झुकाव दक्षिण पंथी संगठनों की तरफ था। वीएचपी की दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ता रही प्रज्ञा ठाकुर बाद में साध्वी बन बैठी और फिर एक दिन 27 सितंबर 2008 को मालेगांव में धमाका होता है, जिसमें सात लोग मारे जाते हैं। 89 लोग जख्मी होते हैं।

मुंबई हमले में शहीद हुए मुंबई एटीएस के चीफ हेमंत करकरे को जांच का जिम्मा मिलता है और जांच के बाद 23 अक्टूबर, 2008 को साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को धमाके की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यहीं से शुरु हुआ साध्वी प्रज्ञा और दूसरे हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी पर जांच की उठापटक। ATS की चार्जशीट में कहा गया कि मुस्लिमों से बदला लेने के मकसद से मालेगांव धमाका करने के लिए 11-12 अप्रैल 2008 को भोपाल में हुई बैठक में साध्वी ठाकुर, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, प्रसाद पुरोहित, सुधाकर धार द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी के साथ मौजूद थीं। भोपाल में हुई बैठक में साध्वी ने विस्फोट के लिए लोग मुहैय्या कराने की जिम्मेदारी ली थी। विस्फोटक पुरोहित की तरफ से मुहैय्या कराया जाना था। विस्फोट करने के लिए प्रज्ञा की बाईक एलएमएल फ्रीडम का इस्तेमाल किया गया था।

NIA ने अपनी जो चार्जशीट दाखिल की उसमें बताया गया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई बाइक प्रज्ञा ने ही खरीदी थी और इसका रजिस्ट्रेशन भी उसी के नाम है। लेकिन बाइक को विस्फोट से पहले रामचंद्र कलसांगरा ही चला रहा था। दो जांच एजेंसियों की अलग-अलग रिपोर्ट की वजह से ही सवाल उठने लगा कि क्या साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को किसी इशारे पर अब क्लीनचिट दिलाई जा रही है। 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों को क्लीन चिट मिलने के बाद इस केस की जांच कर रहे हेमंत करकरे की भूमिका को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए, जिसे लेकर पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर जूलियो रिबेरो ने कहा कि ये करकरे की शहादत का अपमान है।