नेपाल : मधेसी मोर्चा में फूट, सद्भावना पार्टी ने पकड़ी अलग राह

काठमांडू (4 जनवरी) : नेपाल में नए संविधान के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे चार क्षेत्रीय सियासी दलों के गठबंधन में फूट पड़ गई है। मधेसी मोर्चे में शामिल एक मुख्य घटक दल सद्भावना पार्टी ने तराई क्षेत्र में अलग से आंदोलन चलाने का फैसला किया है। सद्भावना पार्टी अभी कुछ समय पहले तक भारतीय सीमा के पास केंद्रित आंदोलनों को वापस लेने के खिलाफ थी। इस पार्टी के नेता राजेंद्र महतो ने सीमावर्ती इलाकों में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। लेकिन, अब पार्टी ने नीति बदली है।

महतो 26 दिसंबर को बिराटनगर में पुलिस से झड़प में घायल हो गए थे। महतो का भारत की राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गांव में मेदांता हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। सद्भावना पार्टी ने रविवार को प्रदर्शन के कई कार्यक्रमों का एकतरफा ऐलान किया।

संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने सद्भावना पार्टी के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'सद्भावना को प्रदर्शन का एकतरफा फैसला नहीं करना चाहिए था। यह गलत है।'

सूत्रों का कहना है कि संयुक्त लोकतांत्रिक मधेस मोर्चा सोमवार को अपनी बैठक में भारत-नेपाल सीमा पर से नाकेबंदी हटाने और सीमा पर प्रदर्शन को रोकने का ऐलान कर सकता है। मोर्चे की बैठक में प्रदर्शन के तौर तरीकों पर चर्चा होगी। ताजा राजनैतिक घटनाक्रमों ने आंदोलनकारी दलों की राजनैतिक सूझबूझ पर सवाल उठा दिया है। आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सद्भावना पार्टी के अलग प्रदर्शन के फैसले से चार महीने पुराना यह आंदोलन कमजोर होगा। मधेसी मोर्चा पर नाकेबंदी हटाने का भारी दबाव है। इसकी वजह से नेपाल में जरूरी चीजों की कमी से हाहाकार मचा हुआ है। उधर, महतो का कहना है कि मोर्चे के नेता काठमांडू में समय बिताना पसंद करते हैं। जमीनी स्तर पर प्रदर्शन को नेतृत्व देने में उनकी रुचि नहीं है।