कर्नाटक को लेकर शिवसेना का केंद्र सरकार को सुझाव, 'राष्ट्रपति शासन लागू करो या विधानसभा को बर्खास्त करो'

Samana

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इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई (22 जुलाई): कर्नाटक में सियासी घमासान जोरों पर है। इसी कड़ी में शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना में संपादकीय लिखकर केंद्र सरकार को सुझाव दिया है। अपने संपादकीय के जरिए शिवसेना ने केंद्र सरकार से अपील की है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करो या कर्नाटक विधानसभा को बर्खास्त करो। जो भी हो लेकिन कर्नाटक का नाटक जल्द खत्म होना चाहिए। अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने लिखा है कि कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार मूकदर्शक क्यों बनी है। शिवसेना ने आगे लिखा कि पार्टी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने या सरकार को भंग करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग करती है और कर्नाटक के लोगों को फैसला लेने का मौका मिले।

शिवसेना ने सामना में लिखा है कि कर्नाटक में फिलहाल जो राजनीतिक तमाशा शुरू है वो आज भी समाप्त होगा, ये कहना कठिन है। बहुमत गंवाकर बैठे कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी विधानसभा में चर्चा कर समय गंवा रहे हैं। उन्हें सीधे मतदान करके लोकतंत्र का पक्ष रखना चाहिए था लेकिन उनकी सांस मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर ऐसी अटकी है कि वो छूटते नहीं छूट रही। राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और कुमारस्वामी ये तीन मुख्य पात्र इस खेल में अपने-अपने पत्ते फेंक रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी उसमें हस्तक्षेप किया है और 15 बागी विधायकों की पांचों उंगलियां घी में हैं।

सोमवार नहीं तो मंगलवार या फिर कभी। कुमारस्वामी को विश्वास प्रस्ताव के समक्ष जाना ही पड़ेगा। लोकतंत्र और संसदीय परंपरा की विरासत का पालन करते हुए कुमारस्वामी को सत्ता का त्याग कर देना चाहिए था। बहुमत गंवा चुका एक मुख्यमंत्री कुर्सी से चिटककर रहने के लिए दयनीय अवस्था में छटपटा रहा है। कांग्रेस का नेतृत्व कमजोर पड़ चुका है। आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में कई विधायक भाजपा में जा रहे हैं। कर्नाटक और गोवा में जो हो रहा है वो इसके पहले कांग्रेस के शासनकाल में कई बार हो चुका है। विधायकों को इस्तीफा देने का संवैधानिक अधिकार है। दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों ने किसी दबाव में आकर इस्तीफा दिया हो तो विधानसभा अध्यक्ष उसे अस्वीकार कर सकते हैं, ऐसा अधिकार उन्हें संविधान ने दिया है।कर्नाटक में सभी लोग लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दोनों तरफ का यह तमाशा केंद्र सरकार शांतिपूर्वक क्यों देख रही है? एक तो वहां राष्ट्रपति शासन लागू करो या कर्नाटक विधानसभा को बर्खास्त करो। कर्नाटक की जनता को ही निर्णय लेने दिया जाए। कुछ भी करो लेकिन कर्नाटक का यह नाटक एक बार खत्म करो!