FiLM Review: जानिए, कैसी है रुस्तम?

नई दिल्ली (12 अगस्त): लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शुक्रवार को अक्षय कुमार की फिल्म 'रुस्तम' रिलीज हो गई। ऐसे में दर्शकों को इंतजार होगा यह जानने का कि आखिर फिल्म कैसी है? आइए आपके सवालों का जवाब देते हैं। 

फिल्म का बैकग्राउंड सबसे पहले जानते हैं कहानी के बैकग्राउंड के बारे में। रुस्तम करीब साढ़े पांच दशक पुराने नानावटी केस पर आधारित है। जिसने पूरे देश को उस वक्त झकझोर दिया था। इस मर्डर मिस्ट्री को देश का पहला ऐसा केस माना जाता है जब राजनेताओं के साथ-साथ दो अलग-अलग कम्युनिटी के लोग इस केस के साथ जुड़े थे।

कहानी 

इंडियन नेवी का कमांडर रुस्तम पावरी (अक्षय) अपनी खूबसूरत बीवी सिंथिया पावरी (इलियाना डीक्रूज़) के साथ बेहद खुश जिंदगी गुजार रहा है। 'रुस्तम' को अपनी डयूटी, अपनी वर्दी और अपनी वाइफ से प्यार है। अचानक रुस्तम को नेवी के एक सीक्रेट मिशन पर कुछ अर्से के लिए विदेश जाना पड़ता है। इसी बीच सिंथिया और शहर के अमीर रंगीनमिजाज सिंधी बिज़नसमैन विक्रम मखीजा (अरजन बाजवा) के बीच नजदीकियां बढ़ने लगती हैं। 

विक्रम और सिंथिया की मुलाकातों को विक्रम की बहन प्रीति मखीजा (ईशा गुप्ता) बढ़ावा देती है, जल्दी ही विक्रम और सिंथिया के बीच लगातार बढ़ती नजदीकियां अवैध संबधों में बदल जाती है। 'रुस्तम' अपनी ड्यूटी कंप्लीट करके एक दिन अचानक जब घर पहुंचता है तो उसे सिंथिला नहीं मिलती है। इसी बीच सिंथिया को विक्रम मखीजा के लिखे कुछ लव लेटर मिलते हैं और इन्हीं लव लेटर से रुस्तम को पता चलता है कि सिंथिया के विक्रम मखीजा के साथ नाजायज संबध हैं। 

रुस्तम नेवी ऑफिस जाकर अपने नाम सर्विस रिवॉल्वर इशू कराकर विक्रम के घर पहुंचता है और विक्रम को एक के बाद एक तीन गोलियां मारता है। विक्रम की हत्या के बाद रुस्तम सीधा पुलिस स्टेशन जाकर अपना गुनाह कुबूल करके खुद को सरेंडर कर देता है। विक्रम की बहन प्रीति किसी भी सूरत में रुस्तम को कोर्ट से सख्त सजा दिलवाने पर आमादा है और वह इसके लिए अपनी दौलत और अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर रही है। यहीं से शुरू होता है इस केस के साथ पारसी और सिंधी कम्युनिटी के प्रभावशाली लोगों के अलावा मीडिया और आम लोगों का जुड़ना जिस वजह से अदालत में चल रहा यह केस बेहद अहम हो जाता है। जिसे देखकर ही आप इसे बेहतर ढ़ंग से एन्जॉय कर पाएंगे।

एक्टिंग, डायरेक्शन और म्यूजिक

फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार किरदार में बिल्कुल परफेक्ट लगे हैं। ईशा गुप्ता ने अपने किरदार के लिए अच्छा होमवर्क किया जिसका असर स्क्रीन पर नजर आया। इलियाना डीक्रूज भी ठीक रहीं। वहीं डायरेक्शन के मामले में टीनू देसाई ने चर्चित नानावटी केस की पृष्ठभूमि पर लिखी स्क्रिप्ट को दमदार अंदाज में पेश किया है। टीनू को एक सशक्त बेहतरीन कसी हुई स्क्रिप्ट मिली और इसी के चलते टीनू ने इस मर्डर मिस्ट्री को ऐसे ढंग से पेश किया कि दर्शक कहानी और किरदारों के साथ जुड़ पाता है।

फिल्म का म्यूजिक पचास के दशक के हिसाब से तैयार किया गया है। रिलीज से पहले दो गाने तेरे संग यारा, और जब तुम होते हो कई म्यूजिक चार्ट में हिट हैं। इन गानों को टीनू ने फिल्म में कहानी का हिस्सा बनाने की अच्छी कोशिश की है।