दोस्त-दोस्त ना रहा! CPEC पर रूस का यू टर्न, भारत के विरोध के बावजूद दिया चीन और पाकिस्तान का साथ

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (19 दिसंबर): भारत और रूस के बीच अटूट दोस्ती रही है। दोनों देश घनिष्ठ मित्रता व सांस्कृतिक और सामरिक साझेदारी के जरिये एक-दूसरे से पिछले 50 दशकों से ज्यादा जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के लोगों के मन में भी हमेशा से एक दूसरे के प्रति मैत्रीपूर्ण भावनाएं रही हैं। पिछले साल दिसंबर में मास्को यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अटूट दोस्ती का जिर्क भी किया था। लेकिन आज इस दोस्ती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कारण है पाकिस्तान और रूस की बढ़ती नजदीकियां। रूस ने चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC)का खुलकर समर्थन किया है। वहीं CPEC जिसका भारत पुरजोर विरोध करता रहा है। रूस भी भारत के इस रूख का समर्थन करता रहा है लेकिन कल आए एक बयान ने भारत के नीति निर्धारकों की नींद उड़ा रखी है। रूस ने CPEC पर पलटी मारी है। CPEC का विरोध करने वाला रूस अब अपने यूरेशन इकनॉमिक यूनियन प्रॉजेक्ट यानि EEUP को CPEC के साथ लिंक करना चाहता है। पाकिस्तान में रूस के राजदूत एलेक्‍सी वाई देदोव ने ये बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रूस CPEC का मजबूती से सपोर्ट करता है, क्योंकि यह न सिर्फ पाकिस्तान की इकोनॉमी के लिए बेहद जरूरी है, बल्कि इससे रीजनल कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलेगा। रूस ने ऐसे वक्त में पाकिस्तान का समर्थन किया है, जब भारत पाकिस्तान को आतंकवाद के मोर्चे पर दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिशें कर रहा है। रूस का यह रुख भारत के लिए काफी चिंता की बात है।

रूस ने क्यों लिया यू-टर्न...

- CPEC पर रूस का यह रुख हैरान करने वाला है।

- पिछले ही महीने उसने CPEC में दिलचस्पी की बात का किया था खंड़न।

- रूस ने जोर देकर पाकिस्तान की उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया था

- जिनमें रूस द्वारा सीपीईसी में दिलचस्पी लेने की बात कही जा रही थी।

- अब पाकिस्तान में रूस के राजदूत एलेक्सी वाई देदोव ने पलटी मारी है।

- पलटी मारने का कारण है CPEC को EEUP से जोड़ना।

- EEUP यानी Eurasian Economic Union project है।

- ये रूस की एक महत्वकांशी परियोजना है।

- जिसके जरिए रूस यूरोप से ईस्ट एशिया को जोड़ना चाहता है।

- वैसे तो रूस ट्रांस साइबेरियन रेल लाइन के जरिए चीन से जुड़ा हुआ है।

- लेकिन अब CPEC के जरिए मध्य एशिया को जोड़ते हुए चीन तक पहुंच हो जाएगी।

भारत को यह है एतराज

- CPEC पाकिस्तान के कराची, ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा।

- CPEC पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरता है।

- इसी कारण भारत को आपत्ति है, इससे पीओके में चीन का प्रभुत्व बड़ रहा है।

- पीएम मोदी CPEC के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एतराज जता चुके हैं।

- CPEC पर भारत के ऐतराज पर रूस भी उसके समर्थन में खड़ा रहा है।

PAK सांसदों को भी है डर CPEC से चीन का गुलाम बन जाए पाकिस्तान...

- CPEC को पाक सीनेट की एक विशेष कमेटी ने भी विफल करार दिया है।

- सीनेट की स्थायी समिति के अध्यक्ष ताहिर मशहादी ने चीन पर लगाया है आरोप।

- डॉन अखबार के अनुसार CPEC समुद्र के किनारे एक और ईस्ट इंडिया कंपनी है।

- CPEC से पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं की जा रही है।

- CPEC पर बलोचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है।

- कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बलोचियों के संसाधनों को लूटने का षडयंत्र है।

- कार्यकर्ताओं ने हाल ही में लंदन में चीनी दूतावास के बाहर CPEC को लेकर प्रदर्शन भी किया।

- प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए बनाई गई हैदर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे विफल माना है।

- कमेटी ने कहा कि कॉरिडोर के 1,674 किमी पश्चिमी हिस्से में सरकार की प्राथमिकता में नहीं।

- डॉन अखबार के अनुसार ग्वादार पोर्ट तक जो सड़क बननी थी वहां निर्माण संभव ही नहीं।

- रिपोर्ट के मुताबिक पोर्ट बन भी गया तो बिजली नहीं मिलेगी क्योंकि ट्रांसमिशन लाइनों का काम ही नहीं हुआ।

CPEC पर चीन को होगा फायदा, साऊथ चाइना सी से जुड़ेगा अरब सागर, शुरू की रेलसेवा...

- 1 दिसंबर को चीन ने पाकिस्तान अपनी पहली रेलगाड़ी भेजी।

- उसने दक्षिण में स्थित कुन्मिंग से कराचीतक मालगाड़ी सेवा शुरू की।

- ये रेल लाइन करीब 3500 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

- युन्नान से होते हुए तिब्बत के रास्ते ये मालगाड़ी गिलगित-बल्तिस्तान में प्रवेश करेगी।

- वहां से इस्लामाबाद, लाहौर होते हुए कराची पहुंचेगी।

- यहां से सामान ग्वादर पोर्ट तक पहुंचाया जाएगा।

- इससे साऊथ चाइना सी को अरब सागर से सीधा जोड़ दिया गया है।

क्या है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), जानिए...

- चीन ने सीपीईसी परियोजनाओं में 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है।

- इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा।

- सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा।

- अभी चीन को ग्वादर पोर्ट जाने के लिए 12 हजार किमी के समुद्री मार्ग से सफर तय करना पड़ता है।

- सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चीन को अपने बॉर्डर से सिर्फ 1800 किमी का सफर तय करना पड़ेगा।

- बीजिंग से ग्वादर पोर्ट की दूसरी महज आधी से भी कम (5200 किमी) रह जाएगी।

- चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं।

- इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है।

- सीपीईसी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

- चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है।

- चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है।

- वहीं, कॉरिडोर के जरिए पश्चिमी चीन में वित्तीय विस्तार मिलने की उम्मीद है, जो कि बंद इलाका है।

- इसके साथ-साथ चीन की योजना अपने गिलगिट-बल्टिस्तान में अपने पैर जमाने की है,जहां लगातार अलगाववादी आंदोलन हो रहे हैं।

- सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए करीब 21 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं।

- अगस्त में गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके लोगों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया है।

- वहां के नागरिकों का आरोप है कि दोनों देश अपने फायदे के लिए इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।

- नागरिकों का आरोप है कि इस योजना में चीन के कामगारों को लगाया गया है, जबकि स्थानीय युवा बेरोजगार हैं।