अमेरिका की तबाही के लिए रूस ने बनाये ये घातक हथियार

नई दिल्ली (25 जनवरी): फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद सोवियत यूनियन ही दुनिया का सबसे बड़ा साम्यवादी देश बना। लेकिन, सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश सोवियत यूनियन के दुश्मन बन चुके थे। इसके चलते सोवियत यूनियन ने अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने और डेडली वेपन्स तैयार करने का सिलसिला शुरू किया, जिनसे पूरी दुनिया खौफ खाती रही।

-  रूस ने चोरी-छिपे कई परमाणु बम 1940 के दशक में ही बना लिए थे। लेकिन, 1945 में जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम फेंके तो सोवियत यूनियन ने भी अमेरिका को दिखाने के लिए इस बम का 9 अगस्त, 1949 को टेस्ट किया था। यह अमेरिका के एटमिक बम से कहीं ज्यादा शक्तिशाली था। इस टेस्ट का मकसद सिर्फ अमेरिका को यह बताना था कि वह सोवियत यूनियन के साथ ऐसी गलती भूल से भी न करे। इस टेस्ट के बाद सोवियत यूनियन के मीडिया ने भी जमकर धमकियां दी थीं कि सोवियत यूनियन अमेरिका के कई शहरों को नागासाकी और हिरोशिमा में बदल सकता है।

- बीटी-5 मिसाइल टैंक

टैंक के डबल इस्तेमाल का आइडिया 1933 में सोवियत यूनियत की रेड आर्मी के इंजीनियर लेबेदेव के दिमाग में आया था। लेबेदेव का यह आइडिया बहुत कमाल का था, क्योंकि टैंक जमीन पर तबाही मचाते तो उनके ऊपर लगी मिसाइलें आसमान में। इसके अलावा जरूरत के हिसाब से मिसाइलों को हर दिशा में घुमाया जा सकता था। यानी की फाइटर प्लेन के अलावा मिसाइलें दुश्मन टैंकों को भी कई किमी दूर से पलक झपकते उड़ा सकती थीं। सेकेंड वर्ल्ड वॉर में सोवियत के इन्हीं टैंकों के दम पर रेड आर्मी ने जर्मन आर्मी को नेस्तानाबूद कर दिया था।

- बार्टिनी बेरियेव वीवीए -14

सोवियत यूनियन के हथियारों में यह सबसे खतरनाक हथियार था। दरअसल, यह पानी पर तैरने वाला फाइटर प्लेन था। इसे अमेरिका की न्यूक्लियर सबमरीन से निपटने के लिए बनाया गया था। इसे जरूरत पड़ने पर हवा में भी उड़ाया जा सकता था। पानी में डूबे रहने के चलते यह आसमान से आसानी से दिखाई नहीं देता था। यह दर्जनों न्यूक्लियर मिसाइलों से लैस था। हालांकि, सोवियत यूनियन को इसकी जरूरत कभी नहीं पड़ी। अब इसे मोनिना के केंद्रीय वायुसेना संग्रहालय में देखा जा सकता है। रशिया ने इसकी जगह अब आधुनिक सबमरींस बना ली हैं।

- एमआईएल एमआई-24

यह सोवियत फोर्स का फाइटर हेलिकॉप्टर था। इसकी पहली टेस्टिंग 1969 में हुई और इसके बाद 1972 तक एयरफोर्स के पास ऐसे सैकड़ों की तादात में फाइटर हेलिकॉप्टर थे। खतरनाक मशीनगन से लेकर मिसाइलों से लैस ये हेलिकॉप्टर इतने फुर्तीले थे कि सोवियत यूनियन ने इसे ‘क्रोकोदिल’ यानी की ‘क्रोकोडाइल’ नाम दिया था।

- मशीनगन ‘दुश्का’

सोवियन यूनियन ने यह खतरनाक मशीनगन 1938 में ही बना ली थी। लेकिन, इसे आधुनिक बनाने की प्रोसेस लगातार चालू रही। 1945 तक इसे इतना खतरनाक बनाया जा चुका था कि इसकी गोलियां करीब 1 किमी दूर तक का सटीक निशाना लगा सकती थीं। इससे प्रति मिनिट 600 राउंड फायरिंग की जा सकती थी। सोवियत यूनियन ने इसे बाद में व्हीकल्स में फिट कर लिया था, जिसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सके। टैंकों व मिसाइलों के साथ इन्हें भी भारी संख्या में बॉर्डर्स पर छिपाकर रखा गया था। इसे दुश्का नाम दिया गया था, रशियन भाषा में इसका मतलब ‘स्वीटी’ होता है।