#World War 3rd के संकेत, रूस ने बनाए ऐसे हथियार जो 5 मिनट में होंगे तैयार

मॉस्को 13 अक्टूबर: विश्व युद्ध के संकेत देने के बाद रूस के ऐसे हथियार सामने आए हैं जो गुब्बारेनुमा है। खबर के अनुसार, रूस ने यह हथियार दुश्मनों को धोखा देने के लिए बनाए हैं और इनकी तैनाती भी शुरू कर दी है। इन फेक हथियारों और साजो-सामान में जेट, मिसाइल, टैंक, मिलिट्री ट्रक से लेकर एयरक्राफ्ट शामिल हैं।

गुब्बारे की तरह फूलने वाला लड़ाकू विमान पांच मिनट में तैयार हो जाता है और असली सा नजर आता है। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के वक्त इसी तरह के फेक हथियारों का इस्तेमाल यूएस और उसके सहयोगी देशों ने किया था। इसी लिए रूस की यह तैयारी बता रही हैं कि वह वाकई में तीसरे विश्व युद्ध की खबर को संजिदा से लेने में जुटा है।

रूस में इस तरीके को मासकिरोवका कहा जाता है... - 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की खबर के मुताबिक, रूस में इस तरीके को 'मासकिरोवका' कहा जाता है। - कई बार इसका इस्तेमाल दूसरे देशों की आर्मी को सरप्राइज करने और धोखा देने के लिए भी किया जाता है। - बता दें कि रूस आर्मी के लिए ये हथियार रसबल कंपनी बना रही है। इस कंपनी को हॉट-बैलून बनाने में महारत हासिल है। - रसबल के पास गुब्बारानुमा वेपंस सिस्टम्स की बड़ी रेंज है। - इसके पास फेक MiG-31, Su-27 जैसे फाइटर प्लेन और T-72 और T-80 जैसे टैंक हैं। - S-300 सरफेस टु एअर मिसाइल बैटरी का कम्प्लीट वर्जन भी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसे पिछले हफ्ते सीरिया भी भेजा गया था। - इसके अलावा यह कंपनी गुब्बारानुमा टैंट, राडार स्टेशन्स और शार्ट-रेंज टैक्टिकल बैलेस्टिक मिसाइल भी बेचती है, जिन्हें आसानी कमांड और कंट्रोल किया जा सकता है।

पांच मिनट में तैयार हो जाता है टी-80 टैंक - इन्फ्लेटेबल टी-80 टैंक की लागत 16000 अमेरिकी डॉलर यानी 10.70 लाख रुपए है। इसकी खासियत यह है कि यह पांच मिनट में तैयार हो जाता है और पैक हो जाता है। - इसका मतलब है कि 31 फर्जी टैंक की पूरी बटालियन को खड़ा करने में करीब ढाई घंटे ही लगेंगे। लागत 4,96,000 डॉलर यानी 3.30 करोड़ में आएगी।

सेकंड वर्ल्ड वॉर में हुआ था इस इन्फ्लेटेबल टेक्निक का इस्तेमाल - इन्फ्लेटेबल वेपनरी का इतिहास सेकंड वर्ल्ड वॉर से जुड़ा हुआ है। 1944 में यूरोप के मित्र देशों के हमले के पहले जनरल एस. पाटोन को फर्स्ट यूएस आर्मी ग्रुप का इनचार्ज बनाया गया था। उस वक्त पाटोन ने शहरों में लड़की, फेबरिक या इन्फ्लेटेबल रबड़ के वाहन तैनात किए गए थे। वहीं, खाली टेंट लगाए गए थे।