रूस के इस कदम ने बढाई भारत की चिंता

नई दिल्ली(19 दिसंबर): पाकिस्तान और रूस की बढ़ती नजदीकियों ने भारत को टेंशन में डाल दिया है। पहले आधिकारिक तौर पर चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रॉजेक्ट में दिलचस्पी नहीं रखने का ऐलान करने वाले रूस ने पलटी मारते हुए अब न सिर्फ उसका मजबूती से समर्थन किया है बल्कि अपने यूराशियन इकनॉमिक यूनियन प्रॉजेक्ट को सीपीईसी के साथ लिंक करने की अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है।  

- सीपीईसी पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में स्थित ग्वादर और चीन के जिनजियांग को जोड़ेगा।

- भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि यह कॉरिडोर पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके से भी गुजरता है, जिस पर भारत का दावा है।

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीपीईसी के मुद्दे पर सीधे चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग से मुलाकात में ऐतराज जता चुके हैं, पर चीन ने भारत की आपत्ति को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है।

- रूस का यह रुख इसलिए भी हैरान कर रहा है क्योंकि पिछले ही महीने उसने जोर देकर पाकिस्तान की उन मीडिया रिपोर्टे्स को खारिज किया था जिनमें रूस द्वारा सीपीईसी में दिलचस्पी लेने की बात कही जा रही थी। अब पाकिस्तान में रूस के राजदूत एलेक्सी वाई डेडोव ने कहा है कि रूस और पाकिस्तान ने सीपीईसी को यूराशियन इकनॉमिक यूनियन प्रॉजेक्ट से लिंक करने को लेकर बातचीत की है।

- डेडोव ने कहा कि रूस सीपीईसी का मजबूती से समर्थन करता है क्योंकि यह न सिर्फ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है, बल्कि इससे क्षेत्रीय संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा।

- कूटनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेल्लाने ने कहा कि रूस से मिल रहे इन मिश्रित संकेतों से भारत-रूस संबंधों में अनिश्चितता आ सकती है। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि जैसे रूस अब भारत को एक विश्वसनीय दोस्त या पार्टनर के तौर पर नहीं देख रहा है। विवादित इलाके से होकर गुजरने वाले सीपीईसी को समर्थन देकर और पाकिस्तान समर्थित तालिबान से बातचीत की बात कह कर रूस असल में सीधे भारत के अहम हितों को चुनौती दे रहा है।'