डॉलफिन के ज़रिए किस सीक्रेट मिशन को साधना चाहता है रूस!

नई दिल्ली (25 अप्रैल) :  रूस अपनी नौसेना में कुछ डॉलफिन को शामिल करने जा रहा है। लेकिन ये रहस्य बरकरार है कि रूस ऐसा क्यों कर रहा है।एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के रक्षा मंत्रालय के एक टेंडर के मुताबिक 5 डॉलफिन के लिए 26,000 डॉलर (17.34 लाख रुपए) की राशि रखी गई। एक महीना पहले रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उसे 'परफेक्ट दांत और बढ़िया मोटर एक्टिविटी' वाली डॉलफिन की तलाश है।    

टेंडर में बताया गया था कि मॉस्को का उतरिश डॉलफिनेरियम तीन नर और दो मादा डॉलफिन की आपूर्ति 1 अगस्त तक करेगा। टेंडर में ये संकेत कहीं नहीं दिया गया है कि इन डॉलफिन का क्या इस्तेमाल किया जाएगा।

बता दें कि शीत युद्ध के सोवियत संघ ने डॉलफिन का इस्तेमाल समुद्री जांच और बचाव के लिए किया था।

हालांकि इनका अन्य इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शीत युदध के दौरान मिलिट्री डॉलफिन के साथ काम कर चुके रिटायर्ड कर्नल विक्टर बारानेट्स ने द गार्डियन को बताया कि डालफिन को दुश्मनों के जहाजो पर विस्फोटक लगाने के लिए ट्रेंड किया गया था।

बता दें कि अमेरिकी नौसेना भी शीत युद्ध के समय से ही अपना डॉलफिन ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चला रही है। लेकिन साथ ही उसका दावा है कि युद्ध उद्देश्यों से डॉलफिन के इस्तेमाल का कोई इरादा नहीं है। अमेरिकी वेबसाइट पर डॉलफिन के ट्रेनिंग प्रोग्राम को लेकर आगाह भी किया है- डॉलफिन ये पहचान नहीं कर सकती कि कौनसा जहाज दुश्मन का है और कौन सा दोस्त का। ना ही वो इंसानों के बारे में भी ऐसी पहचान कर सकती है। ये बुद्धिमानी नहीं होगा कि एक जानवर को ये तय करने का अधिकार दिया जाए। जानवरों को क्षेत्र विशेष में माइन्स और स्विमर्स की पहचान के लिए ट्रेंड किया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें ये भेद करने के लिए तैयार नहीं किया जाए कि हम किसे अच्छा और किसे बुरा मानते हैं।