पाक-चीन की उड़ेगी नींद

नई दिल्ली ( 19 अक्टूबर) : भारत और रूस के बीच हुए इस समझौते से चीन और पाकिस्तान की नींद गायब हो गई है। भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाने के लिए भारत और रूस के बीच अकुला-2 न्यूक्लियर सबमरीन पर समझौता हुआ है। रूसी जर्नल वेदोमोस्ती के मुताबिक ब्रिक्स सम्मेलन से इतर ये समझौता किया गया हालांकि इसकी घोषणा नहीं की गई। हालांकि भारत पहले से ही अकुला-2 न्यूक्लियर सबमरीन को 2011 से लीज पर इस्तेमाल कर रहा है।

खबरों की मुताबिक इस दिशा में दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। करीब पांच साल बाद रूसी सरकार ने बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट 971 पर आगे बढ़ने का फैसला किया। अकुला-2 को भारतीय सेना ने 10 साल के लिए लीज पर लिया था, जिसकी अवधि कुछ सालों के बाद समाप्त हो जाएगी। लिहाजा भारत सरकार भी अकुला-2 को खरीदने की योजना पर काम कर रही थी।

रूस से अकुला-2 वर्ग की परमाणु पनडुब्बी चक्र को 2011 में भारतीय नौसेना में औपचारिक तौर पर शामिल किया गया था। यह पनडुब्बी जनवरी के अंतिम सप्ताह में रूस के नौसैनिक बंदरगाह से रवाना हुई थी। इस पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने के बाद परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी रखने वाली दुनिया की चुनिंदा छह नौसेनाओं में भारतीय नौसेना शामिल हो जाएगी। भारत के अलावा अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और फ्रांस की नौसेनाएं परमाणु पनडुब्बी से लैस हैं।

रूस से मिली परमाणु पनडुब्बी दस साल की लीज पर करीब 95 करोड़ डॉलर में हासिल की गई है। यह पनडुब्बी किसी परमाणु मिसाइल से लैस नहीं होगी, लेकिन इस पनडुब्बी से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता में भारी इजाफा होगा। महीनों तक पानी के अंदर रहने में सक्षम भारत में इस पनडुब्बी का नाम आईएनएस चक्र रखा गया है। रूस की ओर से नेरपा(अकुला-2) सौंपे जाने के साथ ही भारत दुनिया में परमाणु पनडुब्बियों का छठा संचालक हो गया। नेरपा(अकुला-2) में 28 परमाणु क्रूज मिसाइलें लगी हैं और उसकी मारक क्षमता 3000 किमी तक है। भारतीय संस्करण में 300 किमी क्लब की परमाणु सक्षम मिसाइल लगी होने का निर्णय लिया गया है।