इस बार जेपी की जयंती से बदल जाएगा आरएसएस

विष्णु शर्मा, नई दिल्ली (5 जुलाई): आने वाली विजयदशमी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के लिए कुछ खास होगी। ये दिन आरएसएस के लिए एक और ऐतिहासिक दिन होगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसी दिन से आरएसएस में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। हालांकि आरएसएस में ये बदलाव लगातार देखने को मिल रहे हैं, पिछले तीन चार सालों में तो बड़े बदलाव हुए हैं। कम्युनिकेशन और प्रचार के मामले में तो तकनीक ने आरएसएस का पूरा सिस्टम ही बदल दिया है, फेसबुक और ट्विटर एकाउंट्स की तो छोड़िए, जितने वॉट्सएप ग्रुप आरएसएस और सहयोगी संगठनों ने बनाए हैं, उतने शायद दुनिया के किसी संगठन ने नहीं बनाए होंगे। लेकिन तकनीकी बदलाव तो हर कंपनी, संगठन और व्यक्ति को प्रभावित कर रहे हैं, आरएसएस कैसे अछूता रहता, वो तो होने ही थे। इस विजयदशमी से आरएसएस में कुछ ऐसे बदलाव होंगे, जो वाकई में बड़े हैं। सबसे दिलचस्प बात है कि इस बार की विजयदशमी 11 अक्टूबर को है, उसी दिन सम्पूर्ण क्रांति का नारा देने वाले जयप्रकाश जेपी की जयंती भी होती है।

इनमें से एक बदलाव है जिसके बारे में अब तक सबको खबर मिल चुकी है। आरएसएस के स्वंयसेवक अब पेंट पहनेंगे, ब्राउन कलर की पैंट। 13 मार्च को नागौर में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में ये हिस्सा ले लिया गया है, खुद सर-कार्यवाह भैयाजी जोशी ने दुनियां के सामने इसका ऐलान किया। सबसे खास बात ये है कि फैसला तो ले लिया गया लेकिन ये बदलाव सबसे पहली बार दिखेगा विजयदशमी के दिन।

विजयदशमी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि आरएसएस की नींव इसी दिन रखी गई थी। जी हां, विजयदशमी के दिन आरएसएस के स्वंयसेवक खाकी निकर की जगह आपको ब्राउन कलर की पेंट में नजर आएंगे, पूरे 91 साल के बाद। नागपुर समेत देश के कई शहरों में विजयदशमी के दिन पथ संचलन होता है, जिसमें आरएसएस के स्वंयसेवक पूरे गणवेश यानी पूरी यूनीफॉर्म में अनुशासन के साथ सड़कों पर उतरते हैं, एक तरह के शक्ति प्रदर्शन का दिन। लेकिन चूंकि खाकी निकर की जगह इस दिन ब्राउन पैंट दिखेगा, इसलिए देश ही नहीं दुनियां भर की मीडिया के लिए ये खास मौका होगा। हालांकि खास बात ये भी है कि ब्राउन पेंट आ तो गया है लेकिन खाकी निकर को अभी पूरी तरह से विदाई नहीं दी गई है। यानी कि स्वंयसेवक निकर में भी शाखा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि सह सर-कार्यवाह दत्तात्रेय हॉसबोले ने इस बार तृतीय वर्ष का अभ्यास वर्ग खत्म होने के बाद हुए पथसंचलन के होते ही ये ट्वीट किया कि ये आखिरी पथसंचलन है, जिसमें निकर दिखा है।

दिलचस्प बात है कि इस बार ब्राउन पेंट का ऐलान करने वाली प्रतिनिधि सभा की मीटिंग भी राजस्थान के नागौर में हुई थी और ब्राउन पेंट का कपड़ा भी राजस्थान में ही तैयार हो रहा है, भीलवाड़ा शहर में। यहां की एक कंपनी दस लाख पेंट्स का धागा तैयार करने में जुटी है तो कपड़े की प्रोसेसिंग और पैंट सिलने का काम भी राजस्थान के ही चित्तोड़गढ़ जिले में हो रहा है। कपड़ा तैयार करने का काम भीलवाड़ा की आठ कंपनियों को दिया गया है, कुल दस लाख मीटर का शुरूआती ऑर्डर मिला है, किसी को एक लाख तो किसी को दो लाख मीटर का ऑर्डर मिला है। इन सभी कंपनियों के मालिक आरएसएस बैकग्राउंड के रहे हैं जिनमें शामिल हैं गोविंद सोडानी की सत्कार शूटिंग्स, ज्ञानचंद जैन की सुलजरा शूटिंग्स, निरंजन करवा की सनसिटी शूटिंग्स, संजय जैन की अंकुर शूटिंग्स, मुकुंद चिरानियां की शुलज शूटिंग्स और राजेश मोरारका की सुविधा शूटिंग्स। चित्तोड़गढ़ जिले के चौखावड़ी गांव में इस कपड़े की प्रोसेसिंग का काम भी शुरू हो गया है। वहां के टाइटन प्रोसर्स हाउस में ये काम तेजी से चल रहा है।

पेंट्स की सिलाई का काम भी चित्तोड़गढ़ जिले के अकोला के स्वंयसेवक जयप्रकाश के यहां हो रहा है। सालों से संघ के गणवेश को हजारों की तादाद में सिलने का काम उन्हीं के हवाले है। जयप्रकाश के पिताजी भी संघ से जुड़े रहे हैं। लेकिन अभी उन्हें केवल दस हजार पेंट्स का ही काम मिला है। अभी पैंट की सिलाई की कीमत भी उनके साथ तय नही की गई है। जयप्रकाश भी दस हजार पेंट्स की सिलाई के बाद लागत चैक करेंगे कि कितनी आ रही है, उसी के बाद तय होगा, जोकि माना जा रहा है कि 200 से 300 रुपए के बीच होगी। ये दस हजार पैंट जून के महीने में ही नागपुर संघ मुख्यालय भेजे जाएंगे जहां बाकी के ऑर्डर पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि अभी दूसरे राज्यों की शाखाओं से भी आंकड़ा मांगा जा रहा है कि फौरन आपको कितने पैंट्स की जरूरत होगी। वैसे भी गर्मी के अभ्यास वर्ग खत्म हो चले हैं, जो आसान जरिया होगा है गणवेश या बाकी वस्तुएं हर शाखा तक पहुंचाने का। बहुत से स्वंयसेवक ये पेंट खुद भी बनवाते हैं, ऐसे में एक साथ पूरा स्टॉक नहीं तैयार किया जा रहा है। हर राज्य के अपनी अपनी सिलाई वाली शॉप भी हैं, तो ये काम उनको भी दिया जा सकता है। लेकिन मॉडल नमूने के रूप में पहले केन्द्र से पेंट जाएंगी ताकि उसको देखकर बाकी जगहों पर ये पैंट सिली जा सकें। इसकी वजह ये है कि एकरूपता बनी रहे। अक्सर संघ के अभ्यास वर्गों या पथसंचलन में सफेद कमीजों के कपड़ों और सिलाई के तरीकों में काफी वैरायटी नजर आती रही है।

हालांकि पेंट की डिजाइन को लेकर भी लोगों के मन में काफी सवाल हैं। क्या निकर की तरह ही चौड़ी बैल्ट वाले हुक पेंट में होंगे? तो जवाब है हां, ऊपर की डिजाइन कुछ कुछ निकर की तरह ही होगी और प्लेट्स भी निकर की तरह ही होंगी। साथ ही नीचे की तरफ भी यानी घुटने से नीच पेंट बहुत टाइट नहीं होगा और ना ही निकर की तरह ढीला, कोशिश की गई है कि आरामदायक हो ना केवल पथ संचलन में बल्कि शाखा पर होने वाले शारीरिक अभ्यासों के दौरान भी किसी को कोई दिक्कत ना आए। इन पेंट्स की कमर 28 से 46 इंच रखी जा रही है और लम्बाई 30 से 48 इंच तक रखी जा रही है।

इस साल  की विजयदशमी से संघ में एक और बड़ा काम होने जा रहा है। यूं तो संघ का हैडक्वार्टर नागपुर में है, लेकिन दिल्ली का झंडेवालान वाले ऑफिस से भी काफी केन्द्रीय गतिविधियां संचालित होती हैं। कई मायनों में ये नागपुर वाले मुख्यालय से ज्यादा व्यस्त रहता है। अभी तो केन्द्र में सरकार उनकी है, तो ऐसे में लगातार संघ के बड़े पदाधिकारियों और मंत्रियों के बीच सामंजस्य बनाने और बैठक आयोजित करने में दिल्ली के कार्यालय की अहम भूमिका रहती है। संघ से जुड़े बाकी सभी अनुषांगिक संगठनों के मुख्यालय भी नागपुर के बजाय दिल्ली में ही हैं। ऐसे में उनका समन्वय भी ज्यादातर झंडेवालाना कार्यालय से ही होता आया है। लेकिन झंडेवालान कार्यालय सालों से वही पुरानी इमारत में चलता आ रहा है। वही दो मंजिल के हॉस्टल जैसा दिखाई देता है, अगर गेट पर सिक्योरिटी पर मुस्तैद संतरी ना दिखाई दे तो शायद लगे ही नहीं कि ये कोई महत्वपूर्ण इमारत है।

अंदर घुसते ही अब भी वही पानी का पुराने ढंग का प्याऊ मिलता है, एक बड़ा सा मटका भी रखा हुआ है। यहां वहां लोगों के सूखते हुए कपड़े बिलकुल हॉस्टल या आश्रम का सा लुक देते हैं। लेकिन इस विजयदशमी से आएसएस के झंडावालान ऑफिस को नए रूप में लाने की कवायद शुरू हो जाएगी। पूरा प्लान बन चुका है, संघ के अधिकारियों ने अपने स्तर पर नक्शा पास कर दिया है। चूंकि डीडीए जैसी सरकारी एजेंसियों से भी पास करवाना है, तो वो प्रक्रिया चल रही है। इस विजयदशमी के दिन आरएसएस के झंडेवालान स्थित दिल्ली मुख्यालय की नई बिल्डिंग के लिए भूमिपूजन हो जाएगा। सारी तैयारियां इस दिशा में की जा रही हैं। आरएसएस की संरचना में जितने भी आनुषांगिक संगठन हैं, जितने भी राज्य हैं, जो कि सरकार के 29 राज्यों से ज्यादा हैं यानी ब्रज प्रदेश, अवध, प्रदेश और विदर्भ आदि भी शामिल हैं, सभी का प्रतिनिधित्व हो, ऐसी व्यवस्था की जारी है। इस आयोजन को एक राष्ट्रीय आयोजन बनाने की तैयारी है। हालांकि संघ प्रमुख को उस दिन नागपुर रहना होता है, लेकिन दोनों कार्यक्रमों के समय के बीच ऐसा तालमेल किया जाएगा कि वो दोनों कार्यक्रमों में रह सकें।

अब बात ये कि आखिर क्या होगा दिल्ली के झंडवालान कार्यालय का नया रूप। सूत्रों से जो पता चला है उसके मुताबिक नया संघ कार्यालय इतने सारे ओपन स्पेस के साथ केवल दो फ्लोर बिल्डिंग में काम नहीं करेगा, बल्कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के रूप में सामने आएगा ताकि दिल्ली जैसे शहर में संघ के लगातार विस्तार के वाबजूद एक राजधानी वाला कार्यालय होने का दवाब झेल सके। ये दवाब ना केवल रुकने और भोजन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में होगा बल्कि बड़ी मीटिंग्स और सेमिनार हो सकें, अत्याधुनिक मीडिया रूम और लाइब्रेरी जैसी जरूरत को भी पूरा कर सके, इसका खास ख्याल नए नक्शे में रखा गया है। झंडेवालान कार्यालय को केशव कुंज कहा जाता है और इसके मेकओवर का जिम्मा गुजरात के एक ऐसे आर्किटेक्ट को दिया गया है जो फ्रांस में पढ़कर आया है। उसको एक ही लाइन दी गई है कि इसको ऑफिस कम रेजीडेंशियल कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया जाए।

माना जा रहा है कि कुल दस ब्लॉक केशव कुंज में खड़े किए जाएंगे, हर ब्लॉक में चार फ्लोर की इमारतें होंगी। जिसमें लिफ्ट लगी होंगी। पार्किंग के लिए या तो निचला तक खाली छोड़ा जाएगा, या फिर अंडरग्राउंड पार्किंग की व्यवस्था होगी। पहला ब्लॉक बिक्री केन्द्र के रूप में होगा, जिसमें संघ से जुड़ी वस्तुएं, साहित्य, गणवेश, बैज, लाठियां आदि के स्टोर होंगे, टॉयलेट्स होंगे, बाहर से आने वालों के लिए वेटिंग रूम्स होंगे। छोटे छोटे कार्यालय भी होंगे। संघ से जुड़ा पूछताछ कक्ष जैसा भी इस ब्लॉक में हो सकता है। अगले दो ब्लॉक में दिल्ली प्रांत कार्यालय होगा, जिसमें कई तरह की गतिविधियों से जुड़े रूम्स होंगे। दो ब्लॉक्स में पब्लिशिंग सामग्री से जुडे इंतजाम किए जाएंगे, इनका नाम भी प्रकाशन भवन या भारत प्रकाशन हो सकता है। दो ब्लॉक्स में केवल कॉन्फ्रेंस हॉल्स होंगे। अलग अलग संख्या की क्षमता वाले इन हॉल्स में संघ पदाधिकारियों की मीटिंग्स के अलावा वो सभी कार्यक्रम हो सकेंगे जिनके लिए संघ अभी तक कॉन्स्टीट्यूशन क्लब या किसी कॉलेज आदि में आयोजन करता आया है।

एक ब्लॉक में नीचे का फ्लोर चिकित्सालय होगा, एक छोटा सा हॉस्पिटल और स्टाफ होगा, जिसमें आधुनिक चिकित्सा के साथ साथ आयुर्वेद आदि आयुश पद्धतियों को डॉक्टर भी उपलब्ध होंगे और ऊपर के फ्लोर्स में सहायकों और अधिकारियों के लिए रूम्स बनेंगे। जबकि एक और ब्लॉक पूरी तरह रेजीडेंशियल होगा, उसमें कार्यालय से जुड़े प्रचारकों और पदाधिकारियों के रहने की वयवस्था की जाएगी। एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल की भी बात हो रही है, जो खास रिपोर्ट दिखाने के लिए प्रोजक्टर रूम का भी काम करेगा। कुल मिलाकर ऐसा कार्यालय बनाने की तैयारी है, जो अगली कई दशकों तक आने वाली जरूरतों और चुनौतियों का सामना कर सके। तो इस साल के 11 अक्टूबर का ना केवल संघ स्वंयसेवकों को इंतजार है बल्कि मीडिया को भी कम नहीं।