'होमोसेक्सुएलिटी को आरएसएस की हरी झण्डी'

नई दिल्ली (18 मार्च): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि होमोसेक्सुएलिटी तब तक अपराध नहीं मानना चाहिए जब तक को वो दूसरों के जीवन पर असर नहीं डालता हो। संघ की ओर से आये इस बयान के बाद होमोसेक्सुएलिटी को गैरआपराधिक कराने की बहस और तेज होने के आसार हैं। एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसाबले ने कहा, कि सेक्स चुनाव किसी का भी निजी मसला है। 

संघ की तरफ से यह बयान आने के बाद ऐसी उम्मीद उठनी स्वभाविक है कि सरकार आईपीसी की धारा 377 को रद्द करने की कोशिश करे। इसी धारा के तहत समलैंगिकता को अपराध माना जाता है। पिछले महीने होमोसेक्सुएलिटी को गैरआपराधिक बनाने के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन बीजेपी सांसदों के विरोध के चलते सदन ने इसे स्वीकार नहीं किया।

होमोसेक्सुएलिटी पर संघ की तरफ से आए इस बयान के बड़े मायने हैं। बीजेपी में कुछ ही नेता ऐसे हैं, जो होमोसेक्सुएलिटी रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की वकालत करते हैं। हाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जब लाखों होमोसेक्सुएल लोग इसमें (गे सेक्स) शामिल हैं, तो आप उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट भी धारा 377 के खिलाफ दाखिल सभी आठ क्यूरिटिव पिटिशन्स पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की बेंच को यह मामला सौंप दिया है।