पेटीएम की 'सफलता' पर RSS की नजर

नई दिल्ली(28 नवंबर): नोटबंदी के बाद से पेटीएम को जमकर फायदा हुआ है। लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पेटीएम की सफलता पर नजर रख रही है। आरएसएस की आर्थिक इकाई इस फर्म के चाइनीज कनेक्शन पर नजर बनाए हुई है। 

- स्वेदशी जागरण मंच ने कहा है कि वह अब पेटीएम और चाइनीज ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा ग्रुप के रिश्तों की 'स्टडी' करेगा।

- स्वेदशी जागरण मंच पिछले कई सालों से भारत में चीनी सामान और निवेश के खिलाफ अभियान चला रहा है। मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, 'हमने पेटीएम में चाइनीज हिस्सेदारी को लेकर कई खबरें देखी हैं। चूंकि अब हम कैशलेस ट्रांजैक्शंस की तरफ बढ़ रहे हैं, लिहाजा हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारतीय लोगों की तरफ से साझा किया गया डेटा सुरक्षित रहे। किसी भी भारतीय कंपनी को विदेशी कंपनियों के साथ डेटा साझा नहीं करना चाहिए और इन्वेस्टमेंट रूट को बेहद पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।'

- अलीबाबा ग्रुप के ग्लोबल मैनेजिंग डायरेक्टर केगुरु गोरप्पन पिछले महीने पेटीएम के बोर्ड में अडिशनल डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए थे। खबर है कि नोएडा की इस ई-कॉमर्स और मोबाइल पेमेंट कंपनी में अलीबाबा और उससे जुड़ी इकाई अलीपे की 40 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सेदारी है और वह भारतीय मार्केट में ऐंट्री के लिए पेटीएम को अहम हथियार बना सकती है। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने कन्ज्यूमर मार्केट्स में शामिल है।

- महाजन ने कहा, 'हम पेटीएम में चाइनीज इन्वेस्टमेंट के दायरे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हम इस सिलसिले में मीडिया में छपी कुछ खबरों की सत्यता की पड़ताल कर रहे हैं।' उनका कहना था कि स्वदेशी जागरण मंच के एक्सपर्ट मेंबर्स प्राथमिकता के आधार पर पेटीएम की पड़ताल कर रहे हैं और इस कंपनी में चाइनीज हिस्सेदारी के मसले पर दिल्ली में मंच की होने वाली आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी।

-महाजन ने बताया, 'अपनी पड़ताल के आधार पर हम केंद्र सरकार से संपर्क करेंगे। मेक इन इंडिया सिर्फ सामान का मामला नहीं है। हम ई-कॉमर्स में एफडीआई की इजाजत नहीं दिए जाने के लिए सरकार से बातचीत कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि सर्विस प्रोवाइडर्स पूरी तरह से 'भारतीय' हों।'