आरएसएस की संस्था विद्या भारती ने सरकार को सौंपा अजीबोगरीब प्रपोजल

सैय्यदा अफीफा, अमित त्यागी, नई दिल्‍ली (25 जनवरी): संस्कृति रक्षा के नाम पर आरएसएस की विचारधारा पर पहले भी विवाद होते रहे हैं एक नया विवाद फिर हुआ है बच्चों की स्कूली शिक्षा को लेकर आरएसएस की एक संस्था विद्या भारती ने सरकार को एक अजीबोगरीब प्रपोजल सौंपा है। विद्या भारती ने स्कूलों में 12 घंटे की पढ़ाई की सिफारिश की है इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है की सीखने की उम्र में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा स्कूल में वक्त देना चाहिए ताकि वो ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई करें। संस्था ने संस्कृत कि पढ़ाई पर जोर देने की सिफारिश भी की है ।

बच्चों के बस्ते के बढ़ते बोझ ने एक नई बहस को जन्म दिया था। क्या हम अपने ही बच्चों को जरुरत से ज्यादा पढ़ाई का बोझ तो नहीं दे रहे। अब आरएसएस के एजुकेशन विंग ने एक नई बहस चलाई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शिक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली संस्था विद्या भारती का कहना है कि बच्चों के लिए  स्कूलों की टाइमिंग बढ़ाकर 12 घंटे कर देनी चाहिए, 4-6 घंटे की पढ़ाई में वो कुछ नहीं सीख पा रहे,कम से कम 12 घंटे की पढ़ाई तो बनती है बच्चे तो बच्चे इस खबर ने बड़े बड़ों को परेशान कर दिया है। 

दरअसल सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बच्चों में पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार के लिए संस्थाओं से उनके विचार मांगे थे। आरएसएस की संस्था विद्या भारती ने उसी कड़ी में अपने सुझाव भेजे हैं, विद्या भारती के मुताबिक बच्चों के विकास में मिडिल स्कूल की पढ़ाई का सबसे ज्यादा योगदान होता है।  इसलिए कम से कम मिडिल स्कूल में स्कूलों की टाइमिंग 8 घंटे कर दी जाए, इस सुझाव के पीछे एक तर्क ये दिया जा रहा है कि जितने देर के लिए लोग नौकरी रोजगार करते हैं उतनी ही देर बच्चों की पढ़ाई भी हो, बड़े शहरों में बच्चों के माता पिता दोनों ही नौकरी करते हैं इसलिए ऐसा देखते हुए बच्चों की पढ़ाई की टाइमिंग बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया जाए। स्कूल सुबह के साढ़े सात बजे से लेकर शाम के साढ़े सात बजे तक चलने चाहिए ।

विद्याभारती की तरफ से संस्कृत कि शिक्षा पर जोर दिया गया है । तर्क ये है कि बच्चे अपने देश और वहां की संस्कृति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें, विदेशी शिक्षा से संक्रमित छात्रों को संक्रमण मुक्त करने के लिए विद्याभारती संस्कृत की पढ़ाई पर जोर दे रही है । यहां तक की संस्था को-एजुकेशन के भी खिलाफ है। संस्कृति के नाम पर शिक्षा की ऐसी व्यवस्था के बारे में सुनकर बच्चों से लेकर मांबाप अभी से सोच में डूबे हैं। 

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