संघ प्रमुख ने धारा 370 को बताया कश्मीर के विकास में बाधक, संविधान में संशोधन को बताया जरूरी

नई दिल्ली (1 अक्टूबर): धारा 370 को खत्म करने पार जारी विवाद के बीच एकबार फिर संघ प्रमुख ने इसे खत्म करने की वकालत ही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों की भलाई के लिए जरूरी संवैधानिक संशोधनों की जरूरत है, जिससे उनका देश के शेष हिस्सों के साथ पूरी तरह से जुड़ाव हो सके। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी से 1990 के दशक में विस्थापित लोगों की समस्याओं का अब तक हल नहीं हो पाया है।            मोहन भागवत ने संविधान के अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में आवश्यकतानुसार संवैधानिक प्रावधान करने होंगे और पुराने बदलने होंगे। तब ही, जम्मू-कश्मीर के निवासियों का देश के शेष लोगों से जुड़ाव हो सकेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि लद्दाख, जम्मू सहित पूरे जम्मू-कश्मीर राज्य में भेदभाव रहित, पारदर्शी, स्वच्छ प्रशासन के साथ जनता तक विकास का लाभ पहुंचाने का कार्य त्वरित एवं अधिक गति से हो इसकी सख्त जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि राज्य में विस्थापितों की समस्या का समाधान भी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत में रहने के अपने फैसले के कारण वे शरणार्थियों के रूप में दशकों से दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। भारत के नागरिक होने के बावजूद वे शिक्षा, आजीविका तथा लोकतांत्रिक सुविधाओं से अभी भी दूर हैं। भागवत ने कहा कि राज्य के स्थायी निवासियों के साथ ही पाक के कब्जे वाले कश्मीर से 1947 में आए और कश्मीर घाटी से 1990 से विस्थापित लोगों की समस्याएं भी पहले की तरह ही बनी हुई हैं।