सरकारी अनुमान भी फेल, उम्मीद से ज्यादा रकम अब तक बैंकों में जमा

नई दिल्ली(4 दिसंबर): पुराने नोट बदलने की सीमा पूरी होने में 3 हफ्ते और बाकी हैं। केंद्र सरकार ने जितनी उम्मीद की थी उससे कहीं ज्यादा पुराने नोट बैंकों में अब तक जमा हुए हैं। 

- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शनिवार शाम तक 9.85 लाख करोड़ रुपये कीमत के अमान्य नोट बैंकों में जमा हो चुके थे। यह आंकड़ा केंद्र सरकार के उस अनुमान को धता बता रहा है कि नोटबंदी से करीब तीन लाख करोड़ रुपये का काला धन बैंकों में नहीं आएगा और इस तरह यह रकम अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाएगी। 30 दिसंबर तक और नोट जमा होने के आसार के मद्देनजर तीन लाख करोड़ के इस अनुमान में बड़ी कटौती हो सकती है।

- रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का आकलन था कि 14.6 लाख करोड़ रुपये के बड़े नोटों में से 10 प्रतिशत बैंकों में नहीं आएगा जिससे आरबीआई की देनदारी कम हो जाएगी। इस प्रकार यह रकम सरकार के लाभांश के रूप में बचेगी। अमान्य नोटों का बैंकों में लगातार जमा होने का मतलब है कि कालेधनवालों ने पैसे सफेद करने का रास्ता ढूंढ लिया। 

- पीएम नरेंद्र मोदी ने जनधन खातों में अचानक आई बड़ी रकम का जिक्र किया। शुरुआती जांच में पता चला है कि लोगों ने जनधन खातों में एक बार में 49,000 रुपये ही जमा किए ताकि उन्हें पैन नंबर नहीं देना पड़े। गौरतलब है कि एक बार में 50,000 या इससे ज्यादा रुपया जमा करने पर बैंक को पैन नंबर बताना होता है।

- सरकार ने ब्लैकमनी रखने वालों को कामयाब होता देख नियमों में कई बार बदलाव किए। इनकम टैक्स ऐक्ट में बदलाव इसका बड़ा उदाहरण है। इसी तरह जनधन खातों से हर महीने मात्र 10,000 रुपये तक निकाल पाने पर लगाई गई पाबंदी भी है। 

- एक अधिकारी ने कहा, 'यह चूहे-बिल्ली के खेल जैसा हो गया है। इस खेल में सरकार नियमों में बदलाव कर उन लोगों को मात देने की कोशिश में जुटी है जो सरकार से आगे निकल जाने की जुगत में हैं।' इस अधिकारी ने काले धनवालों की कई चालाकियों का जिक्र किया जिनमें शैक्षणिक संस्थान से लेकर अस्पतालों में कर्मचारियों के खातों में पैसे डालकर सिक्यॉरिटी के रूप में पोस्ट डेटेड चेक लेने का उदाहरण शामिल हैं।