देश के बैंकिंग इतिहास में किसी बैंक को सबसे बड़ा नुकसान, एक तिमाही में 3,342 करोड़ का घाटा

नई दिल्ली (15 फरवरी): बैंकिंग सेक्टर के लिए परेशानी को और बढ़ाते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक- बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने पिछली तिमाही के सबसे खराब आंकड़े पेश किए हैं। जिसमें पीएसयू बैंक्स की खराब एसेट क्वालिटी दिखाई गई है। बैंक ने एक तिमाही में कुल 3,342 करोड़ रुपए के नुकसान की जानकारी दी है। यह नुकसान भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक बैंक के लिए सबसे बड़ा नुकसान है। जबकि, इस साल की तुलना में इसी तिमाही में पिछले साल 333 करोड़ रुपए का लाभ दर्ज किया गया था।

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नुकसान बैड लोन्स के प्रावधानों में हुई 463 फीसदी बढ़ोतरी के कारण हुआ है। जो पिछली तिमाही में 1,149 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,474 करोड़ हो गया है। बीओबी इसके पूर्व सीएमडी एसएस मुंदड़ा के आरबीआई डेप्यूटी गवर्नर के तौर पर चयनित किए जाने के बाद बीओबी पिछले 15 महीनों से बिना फुल-टाइम चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के चल रहा था।

हालांकि, 1,118.37 करोड़ का टैक्स राइट-बैक इस नुकसान के लिए एक बड़ी मदद साबित हुआ। नहीं तो, यह नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। इसके साथ ही पीएसयू बैंक्स ने दिसंबर तिमाही में 11,251 कुल नुकसान उठाया है। आरबीआई ने पीएसयू बैंकों से कुछ ट्रबल्ड अकाउंट्स के साथ आधिकारिक बैड लोन्स के तौर पर व्यवहार करने के लिए कहा था। साथ ही उपयुक्त प्रावधान बनाने के लिए भी कहा था।

सबसे खराब प्रदर्शनकर्ताओं में आईडीबीआई बैंक ने 2,184 करोड़ रुपए का नुकसान उठाया है। जबकि, आईओबी ने 1,425 करोड़ तो बैंक ऑफ इंडिया ने 1,505 करोड़ रुपए का। बीओबी की आमदनी में इस तिमाही में कुल गिरावट 11,726.95 करोड़ हुई है। जो पिछली तिमाही में 12,300 करोड़ थी।

बीओबी की एसेट क्वालिटी में इस तिमाही के दौरान गिरावट देखी गई है। बैंक का कुल नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बढ़कर 64.2 फीसदी- 38,934 करोड़ (9.68%) हो गया है। जबकि एनपीए बढ़कर 70 फीसदी से 21,806 करोड़ हो गया है।

बैंक का कहना है, "तिमाही के दौरान ताजा गिरावट 15,603 करोड़ थी। बैंक के रीस्ट्रक्चर्ड स्टैंडर्ड एसेट्स 30 सितंबर 2015 के 22,930 करोड़ से गिरकर 31 दिसंबर 2015 को 17,135 करोड़ हो गया है।"

तिमाही के दौरान, आरबीआई की तरफ से किए गए एसेट क्वालिटी रीव्यू के हिस्से के तौर पर बैंक को कुछ सुझाव दिए गए। जिसमें बैंक को कुछ एडवांस अकाउंट्स के संबंध में अगली दो तिमाहियों के लिए कुछ और प्रावधान बनाने के लिए कहा गया था। जो दिसंबर 2015 और मार्च 2016 में खत्म हो रहे थे। बीओबी के मैनेजिंग डायरेक्टर पीएस जयकुमार और चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने एक बयान में कहा, "बैंक ने इसी अनुसार आरबीआई के निर्देशों का तिमाही में पालन किया। बैंक ने 15 फीसदी के रैगुलेटरी रिक्वायरमेंट से अलग सिक्योर्ड सब-स्टैंडर्ड एडवांस में 20 फीसदी का प्रावधान किया।"

इसके अलावा बैंक ने एडवांस पोर्टफोलियो में सघन पुनर्विश्लेषण किया है। इसके अलावा एनपीएस में अतिरिक्त प्रावधान किए हैं। बैसल थर्ड नॉर्म्स के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा का कैपिटल एडिकेसी अनुपात 12.18 फीसदी है।