रोहिंग्याओं पर रोक के लिए केंद्र ने जारी किए निर्देश, राज्यों को लिखा खत

नई दिल्ली (4 जून): रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमार लौटने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। म्यांमार सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि जो रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश से म्यांमार लौटना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। वहीं अब भारत से रोहिंग्या मुसलमानों को भेजने की तैयारी शुरू होती दिख रही है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक इस सिलसिले में  केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखा है। अपने पत्र में केंद्र ने राज्य सरकारों से गैर कानूननी तरीके से रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को उन्हीं जगहों तक सीमित रखने का निर्देश दिया है जहां वे पहले से रह रहे हैं। साथ ही केंद्र ने रोहिंग्या शरणार्थियों को आधार कार्ड या किसी भी तरह का पहचान पत्र देने से मना किया है।बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार यह तैयारी इसलिए कर रही है कि ताकि इन जानकारियों को म्यांमार सराकर के साथ साझा किया जा सके और भारत में रह रहे रोहिंग्याओं को उनके देश वापस भेजा जा सके। सरकार द्वारा जारी इन निर्देशों से यह पता चलता है कि वह रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच उग्रवादियों की मौजूदगी की आशंका और उनके अपराध में शामिल होने को लेकर चिंतित है। राज्यों को लिखे गए अपने पत्र में केंद्र ने इस बात का भी जिक्र किया है कि रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।आपको बता दें कि पिछले साल इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा लगाए गए अनुमान के मुताबिक भारत के अलग-अलग हिस्सों में करीब 40,000 रोहिंग्या गैर कानूननी रूप से रह रहे हैं। इनमें से जम्मू कश्मीर में 7,096, हैदराबाद में 3,059, हरियाणा के मेवात में 1,114, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1200, दिल्ली के ओखला में 1,061 और जयपुर में 400 रोहिंग्या बसे हुए हैं। सेंट्रल एजेंसियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल और असम में मौजूद दलालों का एक नेटवर्क रोहिंग्याओं के लिए देश में दाखिल होते ही नकली दस्तावेज बनाने का काम कर रहा है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कुछ एनजीओ भी इन्हें कैंप में रहने की सुविधा मुहैया करवा रहे हैं।