जानें कौन है रोहिंग्या मुसलमान ?

नई दिल्ली (10 अप्रैल): जम्मू-कश्मीर में ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान जम्मू और साम्बा जिलों में रह रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश और बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में आने वाले रोहिंग्या मुसलमान देश भर में फैले हुए हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत इनकी आबादी करीब 40 हजार है।


म्यांमार से जान बचाकर दिल्ली पहुंचे अब्दुल्ला कहते हैं कि दुनिया में भारत जैसी आजादी कहीं नहीं है। यहां से भी जाएंगे तो कहां जाएंगे।


कौन है रोहिंग्या मुसलमान ?

रोहिंग्या मुसलमानों का संबंध म्यांमार के पश्चिमी इलाके रखाइन से है जहां इनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है। हालांकि म्यांमार ने कभी इन्हें अपना नागरिक नहीं माना है। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताते हुए कहा था कि ये दुनिया के सबसे प्रताड़ित लोगों में से हैं।


पिछले 4 सालों से म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान तेजी से पलायन कर रहे हैं। इनमें से कई ने बांग्लादेश की सीमा पार करने के बाद भारत में असाइलम के लिए औपचारिक आवेदन कर रखा है। म्यांमार में इन लोगों को ना संपत्ति खरीदने का हक है, और ना ही पढ़ने लिखने का। ये लोग अब भारत में आकर बस गए और वापस नहीं जाना चाहते।


रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के रास्ते कोलकाता आए और फिर भारत के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए। इनमें से कुछ हैदराबाद गए, तो कुछ अलीगढ़ कुछ दिल्ली और जम्मू-कश्मीर। जम्मू में बसने वाले ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, कुछ स्क्रैप डीलर हैं। रोहिंग्या परिवार की कुछ महिलाएं दूसरों के घरों और आस-पास के कारखानों में काम करके कमाई करती हैं।


जून 2012 में म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमान और बौद्धों के बीच दंगे हुए। दंगे में छह सौ रोहिंग्या मुसलमानों की मौत और बारह सौ के लापता हो गए। आग बर्मा में लगी, लेकिन 2012 में उसकी तपिश मुंबई में तब देखने को मिली, जब रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन के लिए कुछ लोगों ने मुंबई के आजाद मैदान पर तांडव किया।


1982 के बाद से म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। जान बचाने को दुनिया भर में भाग रहे रोहिंग्या मुसलमानों की कहानी दर्दभरी भी है। लेकिन इनकी दहशत भी कम नहीं है।