रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने की तैयारी शुरू

नई दिल्ली (10 अप्रैल): मोदी सरकार अवैध रूप से देश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर सख्त है। जम्मू-कश्मीर में रह रहे 10 हजार और देश भर में अवैध तरीके से रह रहे 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर किया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हजारों व्यापारी सड़क पर उतर आए।


पिछले साल अक्टूबर महीने में दक्षिण कश्मीर में हुई एक मुठभेड़ में मारे गए दो विदेशी आतंकवादियों में से एक म्यांमार का मूल निवासी निकला था। इसके बाद से ही रोहिंग्या मुसलमान जम्मू-कश्मीर में शक की निगाह से देखे जाने लगे। जम्मू-कश्मीर में 38 रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ गंभीर मामलों में 12 एफआईआर दर्ज हैं।  


कई शरणार्थियों ने यहां अपना आधार कार्ड भी बनवा लिया है, लेकिन अब व्यापारी और कई राजनीतिक दल रोहिंग्या शरणार्थियों को जम्मू की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए देश से बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जम्मू को शक है कि प्रदेश में आकर बसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिम शरणार्थी अपराधी हैं और ड्रग्स का धंधा भी करते हैं।


CCI ने मांग की है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया जाए और एक महीने के अंदर उन्हें यहां से बाहर भेजा जाए। म्यामांर से जान बचाकर बांग्लादेश और बांग्लादेश से भागकर जम्मू पहुंचे रोहिंग्या मुसलमान वापस भेजे जाने की हलचल और जम्मू के व्यापारियों के इस प्रदर्शन के बाद डरे हुए हैं।