ओला-उबर को GPS की जगह टैक्सी मीटर से वसूलना होगा किराया

नई दिल्ली (30 जुलाई): टैक्सी सर्विस मुहैया कराने वाली कंपनियों उबर और ओला से सरकार ने जीपीएस की जगह टैक्सी मीटरों से किराये का आकलन करने को कहा गया है। 

- रिपोर्ट के मुताबिक, अभी दोनों कंपनियां किराया वसूलने के लिए जीपीएस का सहारा ले रही हैं। - सड़क परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, "टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनियां जीपीएस के जरिए दूरी मापकर कानून का उल्लंघन कर रही हैं। मोटर विहिकल्स एक्ट में टैक्सी मीटर के इस्तेमाल का स्पष्ट निर्देश है।" - अब तक मिले फीडबैक के आधार पर मंत्रालय ने निष्कर्ष निकाला है कि जीपीएस से दूरी का आकलन सही-सही नहीं हो पाता है। - अधिकारी ने बताया, "हमने हाल की बैठक में ओला और ऊबर, दोनों से कह दिया है कि वे इस समस्या को जल्दी सुलझाएं। हमें इन कैब प्रोवाइडर कंपनियों के फेयर मेकनिजम की गड़बड़ियों की शिकायतें मिलती रहती हैं।" - ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस), फोन पर दूरी की माप सैटलाइट्स, सेल साइट्स और वाईफाई के मिले जुले डेटा के जरिए आता है।  - परिवहन मंत्रालय को लगता है कि ब्लैक-एंड-येलो टैक्सी रेट कार्ड ग्राहकों के लिए बेहतर है। - अधिकारियों ने हाल ही में ओला और ऊबर के सीनियर एग्जिक्यूटिव्स के साथ अलग-अलग मीटिंग की थी।