चीन ने निपटने की तैयारी तेज, सीमा पर सड़कों के काम में आएगी तेजी

नई दिल्ली (20 अगस्त): चीन से बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सीमाओं पर सड़कें बनाने के काम में तेजी लाने का निर्णय किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने बॉर्डर रोड्स आर्गनाइजेशन (बीआरओ) के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार को दिया है। रक्षा मंत्रालय के तहत बीआरओ 2015 से सीमावर्ती इलाकों में दुर्गम जगहों को सड़क से जोड़ने के काम में जुटा हुआ है। मंत्रालय ने फैसला किया है कि वह सशस्त्र बलों के साथ मिलकर बीआरओ के लिए प्राथमिकता के तहत प्लान तैयार करेगा। डिटेल प्रॉजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर काम होगा। साथ ही जिम्मेदारी तय करने के लिए काम की प्रगति पर ऑनलाइन नजर रखी जाएगी।

डोकलाम में चीन से तनाव के बीच सीमावर्ती सड़कों की हालत खराब होने की रिपोर्ट आई हैं। कई प्रॉजेक्ट काफी लेट हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत-चीन सीमा के पास जिन 73 सड़कों की पहचान की गई थी, उनमें से सिर्फ 27 पूरे हो सके हैं, जबकि बाकी 2022 तक पूरे हो सकेंगे। पहले इनके 2012 तक पूरा होने का अनुमान था। इन 73 में से 61 सड़कों को बनाने का जिम्मा बीआरओ को मिला है। मंत्रालय को उम्मीद है कि अधिकार बढ़ाने से काम में तेजी आएगी।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह बीआरओ में बहुत बड़ा बदलाव लाने का इरादा रखता है ताकि कार्य की गति को बेहतर किया जा सके और सेना की जरूरत के मुताबिक वांछित नतीजे प्राप्त किए जा सकें। मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने बीआरओ को अतिरिक्त प्रशासनिक शक्तियां देने के अलावा स्वदेशी एवं आयातित निर्माण मशीन एवं उपकरण की खरीद के लिए बीआरओ महानिदेशक की वित्तीय शक्तियां बढ़ा कर 100 करोड़ रुपया तक कर दिया है।

अब से पहले महानिदेशक को 7. 5 करोड़ रुपए तक के स्वदेशी उपकरण और तीन करोड़ रुपए के आयातित उपकरण खरीदने की शक्ति प्राप्त थी। रक्षा मंत्रालय ने टर्नकी आधार पर सड़क परियोजनाओं के काम में बड़ी कंपनियों को लगाने की बीआरओ को इजाजत देने के लिए नीतिगत दिशानिर्देश को भी मंजूरी दी है। डोकलाम को लेकर भारत और चीन की सेनाओं के बीच तकरार होने के मद्देनजर बीआरओ को ये शक्तियां दी गई हैं।