उपेंद्र कुशवाहा को अब पीएम मोदी से अंतिम आस, मिलने का मांगा वक्त


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 सितंबर): 2019 के आम चुनाव में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी  एनडीए का हिस्सा रहेगी या नहीं ये अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है। बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर RLSP अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं और अब आखिरी उम्मीद के तौर पर उन्होंने पीएम मोदी का दरवाजा खटखटाया है। कुशवाहा ने पीएम मोदी से 30 नवंबर तक किसी भी दिन मिलने का समय मांगा है ताकि वो उन्हें बिहार में एनडीए के सियासी हालात के बारे में बता सकें।


एक दिन पहले ही कुशवाहा ने कविता के माध्यम से अंतिम पैगाम भेजा था, जिसमें दिनकर की कविता का उदाहरण देते हुए कहा गया कि अगर न्याय देना है तो ज्यादा दो, अगर उसमें कोई बाधा हो तो केवल हमारा सम्मान दे दो। दिनकर की कविता में यह उस समय का जिक्र किया गया है जब कृष्ण महाभारत टालने के उद्देश्य से कौरवों से मिलने गए थे और केवल पांच गांवों की मांग की थी जिससे युद्ध न हो। उसी कविता के जरिए RLSP ने अपने आधिकारिक ट्विटर से अंतिम पैगाम देने की कोशिश की है, कि कम से कम हमारा सम्मान तो दे दो।


आपको बता दें कि 26 अक्टूबर को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। कुशवाहा उसी वक्त से नाराज चल रहे हैं। इस बार अपनी पार्टी के लिए ज्यादा सीटों के ख्वाहिशमंद कुशवाहा ने इस सिलसिले में बातचीत के लिए बीजेपी अध्यक्ष से वक्त भी मांगा था, लेकिन उनसे उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। यही वजह है कि कुशवाहा अब सीधे पीएम मोदी से मिलकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं।
बताया जा रहा है कि चुनाव में व्यस्त होने के कारण अमित शाह ने उन्हें समय नहीं दिया। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कुशवाहा के बयान से अमित शाह खफा हैं। उनका मानना है कि कुशवाहा ने बिना मतलब विवाद पैदा किया। रामविलास पासवान की पार्टी ने एलजेपी ने मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को नसीहत देते हुए दो नाव पर सवारी नहीं करने की नसीहत दी है। एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को दो नाव पर सवार नहीं होना चाहिए। किसी भी नेता को अपने ही गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ बोलना गलत बात है।