INSIDE STORY: जानिए बिहार के 'DON' की पूरी कहानी... 11 साल बाद 1300 गाड़ियों के काफिले के साथ क्यों निकला सड़क पर

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (10 सितंबर): राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन  को 11 साल बाद जेल से रिहा किया गया। बिहार के बहुचर्चित तेजाब कांड के मुख्य आरोपी शहाबुद्दीन को पटना हाई कोर्ट ने बुधवार जमानत दे दी थी। शहाबुद्दीन के बाहर आते ही बिहार में सियासी भूचाल सा आ गया है। एक तरफ जहां, विपक्ष सरकार पर टूट पड़ी है। सीएम नीतीश कुमार के सुशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं। रिहाई को बिहार में 'जंगलराज की वापसी' की संज्ञा दी जा रही है। दूसरी तरफ सरकार और उसके सहयोगी दलों ने चुप्पी साध रखी है, प्रतिक्रिया आ भी रही हैं तो बड़ी धीमी आवाज में। अपने क्षेत्र सीवान में 'रॉबिनहुड' की छवि रखने वाले शहाबुद्दीन का जेल से बाहर निकले का प्रकरण बिलकुल फिल्मी था। जैसे ही आज सुबह साढे सात बजे भागलपुर जेल के बाहर निकले फिल्मी स्टाइल में हजारों की तादत में मौजूद उनके समर्थकों ने नारेबाजी की। 1300 गाड़ियों का काफिला चार लेन में सड़क के दोनों तरफ उनके स्वागत में खड़ा हुआ था। वैसे शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आते ही उनके बारे में चर्चाओं की बाढ़ आ गई है। कम उम्र में राजनीति में आए शहाबुद्दीन की छवि बाहुबली और दबंग की रही है। आइए जानते हैं फिल्मी सी दिखने वाली इस दंबग की जिंदगी की सच्ची कहानी... 

जेल से बाहर आते ही शहाबुद्दीन सीएम नीतीश पर क्यों भड़के... - मोहम्मद शहाबुद्दीन को भागलपुर जेल से सुबह 7.30 बजे रिहा किया गया। - जेल से बाहर आकर उन्होंने कहा, कोई मुझसे डरा हुआ नहीं, मुझे आतंक का पर्याय कहना गलत है।  - नीतीश के बारे में पूछे जाने पर शहाबुद्दीन ने कहा, नीतीश महागठबंधन के सीएम हैं  - वे मेरे नेता नहीं हैं। मैंने न कभी नीतीश के नेतृत्व में काम किया है, न कर रहा हूं और न करूंगा। - मेरे एक मात्र नेता लालू प्रसाद हैं, मैं पिछले 27 साल से उनके के नेतृत्व में काम कर रहा हूं। - लालू जी जब तक वे जिंदा रहेंगे, मेरे नेता रहेंगे। - बाहुबली इमेज के बारे में सवाल पूछे जाने पर कहा,मैं अपनी इमेज क्यों बदलूंगा। - लोगों ने मुझे इसी तरह 26 साल से स्वीकार किया है।

शहाबुद्दीन पर क्या-क्या आरोप हैं... - शहाबुद्दीन पर सीवान में तीन हत्याओं के दो अलग-अलग मामलों में केस दर्ज है। - सीवान के गौशाला रोड में रहने वाले कारोबारी चंद्रकेश्वर प्रसाद (चंदा बाबू) के दो बेटों सतीश और गिरीश का अपहरण हुआ था।  - 16 अगस्त 2004 को चंदा बाबू के दो बेटों-गिरीश राज (निक्कू) और सतीश राज (सोनू) को उठा लिया गया।  - आरोप लगा कि शहाबुद्दीन के सामने दो भाइयों को तेजाब से नहला कर मार दिया गया। - गिरीश और सतीश के बड़े भाई राजीव रौशन ने बयान दिया था कि मेरे सामने मेरे दोनों भाई मारे गए थे।  - राजीव रौशन ने कहा मेरा भी अपहरण हुआ था, लेकिन मैं किसी तरह भाग निकला।  - मेरे दोनों भाईयों को पहले तेजाब से नहलाया गया। फिर उनको काटा गया।  - राजीव के बयान पर पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से इस मामले को दोबारा खोला गया।  - लेकिन इसी दौरान मुख्य गवाह बने राजीव की भी 16 जून 2014 को हत्या कर दी गई।  - डीएवी गोल चक्कर के पास हुई हत्या में मुख्य अभियुक्त शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा भी आरोपी है। - तमाम दबावों के बावजूद चंद्रकेश्वर प्रसाद (चंदा बाबू) न्याय की लड़ाई लड़ते रहे। - गौरतलब है 6 नबंबर 2005 को शहाबुद्दीन को बिहार पुलिस की एक विशेष टीम ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। - गिरफ्तारी से पहले सीवान के प्रतापपुर में उनके पैतृक घर में पुलिस ने छापा मारा था। - कहा गया छाप में कई अवैध आधुनिक हथियार, सेना के नाइट विजन डिवाइस बरामद हुए थे। - 13 मई 2016 को पत्रकार राजदेव रंजन हत्या में भी शहाबुद्दीन के खास लड्डन मियां पर आरोप लगे थे। - सीवान की कोर्ट ने राजीव रोशन की हत्या के मामले में 9 दिसंबर 2015 को शहाबुद्दीन को दोषी करार दिया। - 11 दिसंबर 2015 को बाकी चार आरोपियों के साथ शहाबुद्दीन को भी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। - शहाबुद्दीन ने सीवान कोर्ट के आदेश को चैलेंज करते हुए पटना हाईकोर्ट में अपील दायर की। - जिस पर हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत दे दी। - शहाबुद्दीन को दोहरे हत्याकांड (तेजाब कांड) में हाईकोर्ट से फरवरी में ही जमानत मिल गई थी।

कौन है मोहम्मद शहाबुद्दीन

- शहाबुद्दीन खौफ का दूसरा नाम है जिसे बिहार में हर कोई जानता है।  - मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के प्रतापपुर में हुआ था।  - राजनीति में एमए और पीएचडी करने वाले शहाबुद्दीन ने हिना शहाब से शादी की थी। - शहाबुद्दीन का एक बेटा है और दो बेटियां भी हैं।  - शहाबुद्दीन ने कॉलेज से ही अपराध और राजनीति की दुनिया में कदम रखा था। - 19 साल की उम्र में ही शहाबुद्दीन ने अपराध की दुनिया में कदम रखा था।  - पहली बार उसने 1990 में जेल में रहते हुए ही निर्दलीय विधायक का चुनाव जीता। 

अपराध की दुनिया में पहला कदम... - अस्सी के दशक में शहाबुद्दीन का नाम पहली बार आपराधिक मामले में सामने आया था। - 1986 में उनके खिलाफ पहला आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था। - इसके बाद उनके नाम एक के बाद एक कई आपराधिक मुकदमे लिखे गए।  - शहाबुद्दीन के बढ़ते हौंसले को देखकर पुलिस ने सीवान के हुसैनगंज थाने में हिस्ट्रीशीट खोल दी। - हुसैनगंज थाने में उन्हें ए श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया गया।

राजनीति में शहाबुद्दीन का उदय... - राजनीति लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में जनता दल की युवा इकाई में कदम रखा। - राजनीति में सितारे बुलंद थे, पार्टी में आते ही शहाबुद्दीन को अपनी ताकत और दबंगई का फायदा मिला। - पार्टी ने 1990 में विधान सभा का टिकट दिया, शहाबुद्दीन जीत गए। - उसके बाद फिर से 1995 में चुनाव जीता, इस दौरान कद और बढ़ गया। - ताकत को देखते हुए पार्टी ने 1996 में उन्हें लोकसभा का टिकट दिया और शहाबुद्दीन की जीत हुई।  - 1997 में राष्ट्रीय जनता दल के गठन और लालू की सरकार बन जाने से शहाबुद्दीन की ताकत बहुत बढ़ गई थी। - 2001 में राज्यों में सिविल लिबर्टीज के लिए पीपुल्स यूनियन की एक रिपोर्ट आई। - रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि राजद सरकार कानूनी कार्रवाई के दौरान शहाबुद्दीन को संरक्षण दे रही थी। 

पुलिस और शहाबुद्दीन समर्थकों के बीच गोलीबारी... - मार्च 2001 में जब पुलिस आरजेडी के एक नेता मनोज कुमार को गिरफ्तार करने आई। - तो शहाबुद्दीन ने गिरफ्तारी करने आए अधिकारी संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था।  - मनोज कुमार पप्पू प्रकरण से पुलिस महकमा सकते में था।  - पुलिस ने मनोज और शहाबुद्दीन की गिरफ्तारी करने के मकसद से शहाबुद्दीन के घर छापेमारी की थी। - इसके लिए बिहार पुलिस की टुकड़ियों के अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद भी ली गई थी।  - छापे की उस कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मियों समेत 10 लोग मारे गए थे। - पुलिस के वाहनों में आग लगा दी गई थी, मौके से पुलिस को 3 एके-47 भी बरामद हुई थी। - शहाबुद्दीन और उसके साथी मौके से भाग निकले थे, इस घटना के बाद शहाबुद्दीन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए थे।

सीवान में चलती थी शहाबुद्दीन की हुकूमत... - 2000 के दशक तक सीवान जिले में शहाबुद्दीन एक समानांतर सरकार चला रहे थे।  - उनकी एक अपनी अदालत थी। जहां लोगों के फैसले हुआ करते थे।  - वह खुद सीवान की जनता के पारिवारिक विवादों और भूमि विवादों का निपटारा करते थे।  - यहां तक के जिले के डॉक्टरों की परामर्श फीस भी वही तय किया करते थे।  - कई घरों के वैवाहिक विवाद भी वह अपने तरीके से निपटाते थे।  - वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई जगह खास ऑपरेशन किए थे। जो मीडिया की सुर्खियां बन गए थे।

चुनाव लड़ने पर रोक... - अदालत ने 2009 में शहाबुद्दीन के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। - उस वक्त लोकसभा चुनाव में शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने पर्चा भरा था, लेकिन वह चुनाव हार गई।  - उसके बाद से ही राजद का यह बाहुबली नेता सीवान के मंडल कारागार में बंद है। - शहाबुद्दीन पर एक साथ कई मामले चल रहे हैं और कई मामलों में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है।  - मार्च 2016 में बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफूर आरजेडी के एक विधायक के साथ सीवान जेल में शहाबुद्दीन से मिलने पहुंचे थे। - इस मुलाकात के फोटो मीडिया में आने के बाद काफी विवाद हुआ था, इसके बाद शहाबुद्दीन को भागलपुर जेल भेजा गया था।