#Salman की ‘किक’ देख छोड़ी 48 लाख रुपए की कमाई

अहमदाबाद (19 जुलाई): क्या किसी फिल्म को देखकर कोई युवा 48 लाख रुपये की कमाई छोड़ सकता है। शायद आप इसे बेवकूफी भरा निर्णय कहेंगे, लेकिन अहमदाबाद के एक युवक ने रितेश शर्मा ने ऐसा ही कुछ किया।

रितेश शर्मा ने पहले आर्मी ज्वाइन करने का सोचा था। इसके लिए कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्होंने कम्बाइंड डिफेंस सर्विस की परीक्षा पास कर ली। हालांकि, घुटने की चोट के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। वे डिप्रेशन में आ गए। गिटार बजाने का शौक था, इसलिए एक म्युजिकल ग्रुप बना लिया, जिसका नाम रखा 'वीएस म्युजिकल ग्रुप'। यहीं से रितेश ने म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट्स सेलिंग का बिजनेस शुरू किया, जो लगातार दस वर्ष तक चलता रहा। इससे वे एक साल में करीब 48 लाख रुपए कमा लेते थे। इसके बाद उन्होंने सलमान खान की फिल्म ‘किक’ देखी, बस तभी से उनकी सोच बदल गई। कुछ नया करने की चाहत यहीं से पैदा हुई।

उन्होंने अपना एक एनजीओ बनाया, जिसका नाम रखा highly energized youth helping Indians यानी (हे हाय)। अब वे सोशल एक्टीविस्ट बनकर समाज सेवाकर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी कमाई से खरीदी एसयूवी कार और तीन बाइक को घर पर छोड़कर साइकिल से खादी का कुर्ता पहनकर लोगों को जाग्रत करने का काम कर रहे हैं। डेढ़ साल हो गए, उन्होंने अपने म्युजिकल इंस्ट्रुमेंट की सप्लाई का काम बंद कर दिया है। उनके एनजीओ में चार शहरों में कुल 23 वालींटियर्स हैं, जो उस शहर में अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। रितेश का मानना है कि अगर सड़क पर गड्ढा है कि इसके लिए हम सरकार से शिकायत क्यों करें? क्यों न उस काम को हम ही कर दें। इस तरह के विचारों के साथ रितेश आगे बढ़ रहे हैं।

जेब खर्च से निकलता है एनजीओ का खर्चा: अक्सर एनजीओ के बारे में यह धारणा है कि इसमें विदेशों से काफी धन आता है। पर रितेश एवं उनके साथी अपने जेब खर्च से एनजीओ चलाते हैं। चार मेट्रोपोलिटन शहरों के स्लम के 42 बच्चों को गोद लिया है। इनकी पढ़ाई का जिम्मा रितेश एवं उनके साथियों ने लिया है। इस समय भी वे इस दिशा में काम करने के लिए साइकिल पर निकल पड़ते हैं।

देश भर में पेरलल गवर्नमेंट ग्रुप बनाने की इच्छा: रितेश बताते हैं कि मैं जब कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था, तब ही इस इवेंट पर काम करते हुए अपना जेब खर्च निकाल लेता था। आर्मी ज्वाइन नहीं कर पाया, इसका अफसोस है। पिछले दस वर्षों में मैंने अपने जीवन की आवश्कताओं के लायक धन जमा कर लिया है। बस अब देश के लिए कुछ करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मैं चारों शहरों के अपने साथियों के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूं।