आपके आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है बहुत बड़ा फैसला

नई दिल्ली(24 अगस्त): निजता के अधिकार पर आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से गुरुवार को यह फैसला सुनाया। 21 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की थी।

- राइट टू प्राइवेसी का मुद्दा तब उठा, जब सोशल वेलफेयर स्कीम्स का फायदा उठाने के लिए आधार को केंद्र ने जरूरी कर दिया और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशंस दायर की गईं। इन पिटीशंस में आधार स्कीम की कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी को यह कहकर चैलेंज किया गया कि ये प्राइवेसी के बुनियादी हक के खिलाफ है।

- इसके बाद 3 जजों की बेंच ने 7 जुलाई को कहा कि आधार से जुड़े सभी मुद्दों का फैसला बड़ी बेंच करेगी और चीफ जस्टिस कॉन्स्टिट्यूशन बेंच के गठन का फैसला लेंगे। तब चीफ जस्टिस जेएस खेहर के पास मामला पहुंचा। उन्होंने 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच का गठन किया। इस बेंच ने 18 जुलाई को 9 जजों की बेंच के गठन का फैसला लिया।

- सुप्रीम कोर्ट ने 1954 और 1962 में राइट टू प्राइवेसी के मामले में फैसला सुनाया था। इन मामलों में 6 और 8 जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था। इन फैसलों में कहा गया था कि प्राइवेसी फंडामेंटल राइट नहीं है। ऐसे में 9 जजों की बेंच का गठन किया गया ताकि इन फैसलों की सत्यता को जांचा जा सके। 1962 में खड़क सिंह और 1954 में एमपी शर्मा के केस में SC ने ये फैसला सुनाया था।

- नौ जजों की कॉन्सिट्यूशन बेंच के हेड चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर हैं। इसमें जस्टिस जे चेलेमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके आग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस अभय मनोहर सप्रे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय कृष्ण कौल और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

- इस मामले में पिटीशनर्स में कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केएस पुट्टस्वामी, नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के पहले चेयरपर्सन रहे मैग्सेसे पुरस्कार सम्मानित शांता सिन्हा और रिसर्चर कल्याणी सेन मेनन शामिल हैं।