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आज भी 'रेजांग ला' के नाम से खौफ खाता है चीन

लद्दाख (13 जनवरी): आए दिन चालबाज चीन भारत को गीदड़ भभकी देता रहता है। लेकिन वो अबतक 1962 के युद्ध को नहीं भुल पाया है। ये दिगर बात है 1962 के युद्ध में एक मायने में भारत को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन भारत ने उस युद्ध में चीन को जो जख्म दिया था वो आज भी हरे हैं।

इसका एक मिशाल लद्धाख में भी देखने को मिलता है। और यहां का रेजांग ला मेमोरियल इसका गवाह है। यह वह जगह है जहां 1962 के युद्ध में भारत और चीन के सैनिकों के बीच ऐसी लड़ाई लड़ी गई, जो दुनियाभर की सेनाएं एक मिलास की तौर पर याद करती हैं। इस लड़ाई में 120 भारतीय जवानों ने 1300 चीनी जवानों को मौत के घाट उतार कर चीन से लद्दाख को बचाया था।

दरअसल भारत के साथ दोस्ती का कस्मे वादा करने वाले चीन ने तिब्बत पर हमला कर वहां कब्जा कर लिया। चीन के इस हमले से बाद वहां का दलाई लामा किसी तरह से अपनी जान बचाकर भारत पहुंचा और भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दे दिया। इससे नाराज चीन ने भारत पर हमला कर दिया।

18 नवंबर, 1962 की रात अंधेरे और बर्फबारी के बीच चीन ने दक्षिण लद्दाख के रेज़ांग ला में हमला कर दिया। उस वक्त चुशूल में 13 कुमाऊं रेजीमेंट तैनात थी और रेज़ांग ला में इस रेजिमेंट की एक टुकड़ी मौजूद थी, जिसका नाम था चार्ली कंपनी। इस कंपनी को कमांड कर रहे थे मेजर शैतान सिंह। युद्ध के दौरान जब भारतीय सैनिकों की गोलियां ख़त्म हो गईं थीं, तब उन्होंने चाकू-छुरे और पत्थरों का इस्तेमाल करके दुश्मन को मारा था। अंत में भारतीय सैनिक, चीन के सैनिकों के ख़िलाफ खाली हाथ भी लड़ते रहे थे।

ये लड़ाई कितनी भयानक थी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि 120 भारतीय सैनिकों में से 114 सैनिक अपनी जगह लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इनमें से 5 को बेहद ज़ख्मी हालत में चीन ने बंदी बना लिया था।

इन बचे हुए जवानों में से एक सिंहराम ने बिना किसी हथियार और गोलियों के चीनी सैनिकों को पकड़-पकड़कर मारना शुरु कर दिया। मल्ल-युद्ध में माहिर कुश्तीबाज सिंहराम ने एक-एक चीनी सैनिक को बाल से पकड़ा और पहाड़ी से टकरा-टकराकर मौत के घाट उतार दिया। इस तरह से उसने दस चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

3वीं कुमाऊं रेजीमेंट का एक नाम वीर-अहीर भी है। क्योंकि इसमें ज़्यादातर मौकों पर राजस्थान और हरियाणा के यादव ही भर्ती किए जाते हैं। इसलिए रेज़ांग ला को अब अहीर धाम भी कहा जाता है।


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