ज़मीन विवाद में रिटायर्ड अफसर का कत्ल

अधीर यादव, देहरादून (27 जुलाई): देहरादून में ज़मीन के विवाद ने एक रिटायर्ड अफसर का कत्ल हो गया। कातिलों ने पहले रिटायर्ड अफसर को कुल्हाड़ी मारी, फिर जलाया और बाद में अधजली लाश पर नमक छिड़ककर दफना दिया। लेकिन हत्यारों की कोई भी चाल काम नहीं आ सकी और कातिल पड़ोसी पुलिस की गिरफ्तर में आ गए।

कातिलों के पकड़े जाने के बाद 24 जुलाई को देहरादून में ओएनजीसी से रिटायर हुए मोहन सिंह पयाल की गुमशुदगी की गुत्थी पूरी तरह से सुलझ गई है। सोमवार को देहरादून पुलिस को डोईवाला के जंगलों में मोहन सिंह पयाल की जली कार पाई गई और तफ्तीश के बाद वहीं से उनकी अधजली लाश भी बरामद की गई। कार के साथ ही जले हुए नोटों की गड्डियां भी मिली। देहरादून पुलिस ने अपनी जांच का दायरा आगे बढ़ाया तो सामने आई ऐसी घिनौनी साजिश जिसने होश उड़ा दिए।

दरअसल मोहन सिंह पयाल ने देहरादून के भोपाल पानी इलाके में रहने वाले जोगिंदर और उसके भाइयों से कुछ दिनों पहले एक जमीन का सौदा किया था, रिटायर होने के बाद मोहन सिंह पयाल ने अपनी जिंदगी की पूरी जमा पूंजी इस जमीन के सौदे में लगा दी थी। लेकिन उन्हें क्या पता था यहीं जमीन उनकी जिंदगी पर भारी पड़ा जाएगी। मोहन सिंह ने जोगिंदर और उनके भाईयों से जिस जमीन का सौदा किया था, उसकी पूरी कीमत उन्होंने चुका दी थी। लेकिन जोगिंदर को उसके हिस्से की रकम नहीं मिल पाई थी।

जोगिंदर ने मोहन सिंह पयाल से अपना हिस्सा मांगा, जबकि मोहन सिंह पयाल ने पूरी पेमेंट करने का हवाला देते हुए पैसा देने से इनकार कर दिया। बात इतनी बढ़ी कि गुस्से में जोगिंदर ने मोहन सिंह पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिसके बाद मोहन सिंह की तुरंत मौत हो गई। मोहन सिंह की हत्या के बाद आरोपी जोगिंदर ने अपनी पत्नी सत्यवती और बेटे महेश के साथ मिलकर मोहन सिंह की लाश को उन्हीं की कार में डालकर जंगल पहुंच गए, जहां कार समेत मोहन सिंह की लाश को भी आग लगा दी।  

लेकिन बारिश होने की वजह से लाश पूरी तरह जल नहीं पाई और अधजली लाश को वहीं गड्ढे में दबा दिया। देहरादून पुलिस के सामने मोहन सिंह के कातिलों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, लेकिन इस सवाल का जवाब अभी बाकी है कि अगर मोहन सिंह ने जमीन के सौदे की सारी रकम चुका दी थी तो जोगिंदर को उसके हिस्से की रकम क्यों नहीं मिली। जो मोहन सिंह की मौत की असली वजह बनी।