रेस्टोरेंट में 'सर्विस चार्ज' पर गिर सकती है गाज, हो सकता है खत्म!

नई दिल्ली (30 अगस्त): रेस्टोरेंट में ग्राहकों से ज्यादा वैट वसूलने का मामला गहराता जा रहा है। जानकारों का कहना है कि विवाद की जड़ में टिप के नाम पर वसूला जाने वाला 10 पर्सेंट सर्विस चार्ज (सर्विस टैक्स नहीं) है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।

अब कोर्ट की निगाह में आने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि सेवा के नाम पर लिया जाने वाला यह चार्ज हाशिए पर आ जाए। वैट विभाग ने साफ किया है कि वह कुल बिल पर वैट चार्ज करता है, जिसमें सर्विस चार्ज शामिल होता है, न कि सर्विस टैक्स। सर्विस टैक्स कुल बिल के 40 पर्सेंट हिस्से पर लगता है, जो केंद्र को जाता है।

मान लीजिए किसी रेस्ट्रॉन्ट में फूड या ड्रिंक्स की कीमत 1,000 रुपये है। कुल बिल होगा 1000 प्लस 100 रुपये ( 10 पर्सेंट सर्विस चार्ज) यानी 1100 रुपये। इस पर 12.5 पर्सेंट की दर से 137 रुपये वैट लगेगा। जहां तक केंद्रीय सर्विस टैक्स का सवाल है, वह 1100 के 40 पर्सेंट यानी 440 रुपये पर 15 पर्सेंट (सेस सहित) के हिसाब से 66 रुपये लगेगा। इस तरह ग्राहक को कुल 1303 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। दोनों कर अलग-अलग लिए गए हैं।